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Sovereign Gold Bond: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या होता है, करना चाहते हैं निवेश तो जान लें इसके फायदे और नुकसान

What is Sovereign Gold Bond:सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को RBI जारी करता है।इस स्कीम के जरिए ग्राहकों को सस्ते में सोना खरीदने का मौका मिलता है।

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Kalpana Madhu
Sovereign Gold Bond: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या होता है, करना चाहते हैं निवेश तो जान लें इसके फायदे और नुकसान

What is Sovereign Gold Bond: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जारी करता है।  इस स्कीम के जरिए ग्राहकों को सस्ते में सोना खरीदने का मौका मिलता है।

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Sovereign Gold Bond स्कीम में आप कमर्शियल बैंकों के अलावा मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों NSE, BSE, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश कर सकते हैं।

चूंकि इन बॉन्ड्स को सरकार की ओर से RBI की तरफ से जारी किया जाता है और उन्हें सरकारी गारन्टी के साथ दिया जाता है इसलिए निवेशकों को इसमे फायदे की उम्मीद ज्यादा दिखती है। हालांकि अन्य विकल्पों की तरह ही गोल्ड बॉन्ड में निवेश के फायदे और नुकसान दोनों ही होते हैं।

इस सोने पर मिलती है सरकारी गारंटी

Sovereign Gold Bond सरकार की ओर से RBI द्वारा जारी किया जाता है, इसलिए इस पर सरकारी गारंटी होती है।

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Sovereign Gold Bond में निवेश पर सालाना 2.5 फीसदी ब्याज मिलता है। यह पैसा हर 6 महीने में निवेशकों के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है। इसमें ऑनलाइन निवेश करने पर 50 रुपए प्रति ग्राम की छूट निवेशकों को दी जाती है।

कब हुई थी इसकी शुरुआत

सरकार ने साल 2015 के नवंबर महीने में स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (gold monetization scheme)  के तहत Sovereign Gold Bond योजना की शुरुआत की थी। यह बॉन्ड बाजार से कम कीमत में सोने में निवेश (Gold Investment) का मौका देती है।  इस स्‍कीम के तहत हर साल 2.75 प्रतिशत का रिटर्न फिक्‍स्‍ड है।

अधिकतम कितना किया जा सकता है निवेश

कोई भी शख्स इस बॉन्ड के जरिये एक वित्त वर्ष में कम से कम 1 ग्राम से लेकर 4 किलोग्राम सोने में इनवेस्ट कर सकता है।  हालांकि अगर कोई ट्रस्ट इस बॉन्ड में निवेश कर रहा हो तो उनकी अधिकतम सीमा 20 किलो है।

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अब तक निवेशकों की कितनी हो चुकी है कमाई

इस बॉन्ड ने पहली किस्त में 12.9 प्रतिशत का सालाना रिटर्न (annual return) दिया है।  साल 2015 में इस स्‍कीम के तहत निवेशकों को 2,684 रुपये प्रति ग्राम की कीमत पर सोने में इनवेस्ट करने का मौका दिया गया था।

वहीं एक बार मैच्‍योर हो जाने पर इस ग्राम की कीमत 6,132 रुपये हो गई है।  RBI डाटा के मुताबिक, पहली किस्त से 245 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था।

कैसे खरीदें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

आप Sovereign Gold Bond को कमर्शियल बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL), क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL), नामित डाकघरों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और Bombay Stock Exchange लिमिटेड से खरीद सकेंगे।

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कोई भी भारतीय कम से कम एक ग्राम और अधिकतम चार किलोग्राम सोने में निवेश कर सकता है। वहीं किसी ट्रस्ट के लिए खरीद की अधिकतम सीमा 20 किलो है।

कहां से खरीद सकते हैं बॉन्ड

Sovereign Gold Bond सभी बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL), नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों (Stock Exchanges), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड (BSE) के माध्यम से बेचे जाते हैं।

स्मॉल फाइनेंस बैंक (Small Finance Bank) और पेमेंट बैंकों (Payment Bank) को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेचने की अनुमति नहीं होती है।

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गोल्ड बॉन्ड में निवेश के नुकसान (Disadvantages of SGB)

मैच्योरिटी

8 साल की लंबी मैच्योरिटी अवधि के कारण बहुत से निवेशक सोने के बोंड से नाखुश हैं। हालांकि, यह लंबी अवधि वास्तव में सबसे महत्वपूर्ण स्वर्ण बांड लाभों में से एक है। सरकार ने सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव से निवेशकों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए मैच्योरिटी पीरियड लंबी रखी है।

यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि निवेशक निवेश की तारीख से 5 साल के बाद भी बोंड को रिडीम कर सकते हैं।

कैपिटल लॉस

अगर सोने की कीमतों में गिरावट आती है तो इसका नुकसान केवल निवेशक को ही उठाना पड़ता है। सोने की कीमतों में गिरावट गोल्ड बॉण्ड पर नकारात्मक रिटर्न देती है। इस लिहाज से गोल्ड बॉन्ड में निवेश का यह एक बड़ा नुकसान है।

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निकासी नहीं है आसान

Sovereign Gold Bond में अगर आपको पांच वर्ष से पहले पैसों की जरूरत है तो इसमें निकासी मुमकिन नहीं है, ऐसा इसलिए क्योंकि यह लिक्विड नहीं होता है।

लिक्विडिटी की जरूरत भविष्य के किसी भी लक्ष्य को या फिर अनिश्चित खर्चों को पूरा करने के लिए ही नहीं होती है बल्कि यह उस स्थिति में भी काम आती है जब आपका निवेश अन्य विकल्पों की तुलना में बेहतर रिटर्न नहीं दे रहा होता है।

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