Sonam Raghuvanshi Case: छपरी BF के लिए 'हैंडसम' पतियों को क्यों मार रही महिलाएं! क्या ये हो सकता है कारण?

sonam raghuvanshi : क्या महिलाएं अब हिंसक होती जा रही हैं? सोनम रघुवंशी, मुस्कान रस्तोगी जैसे केस महिलाओं की बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हैं। जानिए इसके पीछे के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारण।

Sonam Raghuvanshi Case: छपरी BF के लिए 'हैंडसम' पतियों को क्यों मार रही महिलाएं! क्या ये हो सकता है कारण?

देश में अपराध के मामले दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। हैरानी की बात तो ये है की बराबरी की बात करने वाली महिलाएं इसमें पुरुषों को टक्कर दे रही है। आए दिन कभी पति तो कभी प्रेमी या फिर अपने ही परिजनों की हत्या करने में महिलाएं सामने आ रही है। इंदौर की सोनम रघुवंशी, मेरठ की मुस्कान रस्तोगी, आगरा की एक महिला इन सबका जुर्म हैरान करता है, लेकिन एक सवाल बार-बार सामने आता है क्या महिलाओं में हिंसा बढ़ रही है? और अगर हां, तो क्यों?

सोनम रघुवंशी केस: हनीमून पर हत्या की साजिश

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इंदौर की सोनम रघुवंशी का मामला इन दिनों चर्चा में है। शादी के कुछ ही दिन बाद, वह अपने पति राजा रघुवंशी के साथ हनीमून पर मेघालय गई थी। लेकिन वहां उसने पति की हत्या की साजिश रच दी। वजह थी उसका प्रेमी, राज कुशवाह। पुलिस की मानें तो सोनम पहले से ही प्रेमी के साथ रिश्ते में थी और पति उसके इस रिश्ते में ‘रुकावट’ बन रहा था। इसलिए उसे रास्ते से हटाना जरूरी समझा।

नीला ड्रम केस: पति की लाश को सीमेंट में दबाया

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मेरठ की मुस्कान रस्तोगी ने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या की। हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटा और एक नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से बंद कर दिया। यह मामला सोशल मीडिया से लेकर संसद तक में गूंज उठा।

सांप रखकर मर्डर को हादसा दिखाने की कोशिश

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एक अन्य मामले में रविता नाम की महिला ने अपने प्रेमी अमरदीप संग मिलकर पति की हत्या की और फिर शव के पास सांप रखकर उसे हादसा साबित करने की कोशिश की।

पति को 65 किमी दूर फेंका शव

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आगरा में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की गला दबाकर हत्या की। फिर शव को ऑटो में डालकर 65 किलोमीटर दूर मथुरा जिले में फेंक दिया।

महिलाएं क्यों उठा रही हैं इतने खौफनाक कदम?

कई शोध और रिपोर्ट्स इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। चलिए समझते हैं इन जघन्य अपराधों के पीछे की मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और संस्कृतिक वजहें:

1. मनोवैज्ञानिक कारण: प्यार का जुनून और घृणा की आग

बंसल हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार प्रेम में पड़ने का जुनून  कभी-कभी इंसान को तर्कहीन बना देता है।

डोपामाइन का नशा: जब कोई प्यार में होता है, तो दिमाग में डोपामाइन निकलता है जो खुशी और नशे जैसा असर देता है। यही जुनून, पति के प्रति घृणा को जन्म दे सकता है।

कोर्टिसोल का उफान: तनाव और गुस्से में कोर्टिसोल रिलीज होता है जो हिंसक निर्णयों को बढ़ावा देता है।

दिमाग के ‘खाने’: प्रेम और नफरत को दिमाग अलग-अलग ‘फोल्डर्स’ में रखता है इसलिए एक महिला अपने प्रेमी से प्यार और पति से नफरत एक साथ कर सकती है।

2. सामाजिक दबाव और पितृसत्तात्मक रिश्ते

स्वतंत्रता बनाम संस्कार: आज की महिलाएं ज्यादा शिक्षित और आत्मनिर्भर हैं, लेकिन समाज अभी भी प्रेम विवाह को गलत नजर से देखता है। ये टकराव तनाव और अपराध को जन्म दे सकते हैं।

अत्याचार से बचाव: कुछ महिलाएं अपमानजनक और नियंत्रक वैवाहिक जीवन से निकलने के लिए चरम कदम उठा लेती हैं।

प्रेम को बचाने का जुनून: जब प्रेमी से अलग होने का डर बहुत ज्यादा होता है, तब महिला 'कुछ भी' करने को तैयार हो सकती है।

डेटा क्या कहता है?

NCRB (2022) के अनुसार

भारत में महिलाओं की भागीदारी हिंसक अपराधों में बढ़ रही है।

प्रेम प्रसंग से जुड़े हत्याओं में महिलाओं की संलिप्तता में पिछले 5 वर्षों में 28% की वृद्धि देखी गई है।

अंतरराष्ट्रीय शोध क्या बताते हैं?

फ्रांस का अध्ययन: जिन महिलाओं ने बचपन में यौन हिंसा झेली, उनमें डेटिंग हिंसा और अपराध की प्रवृत्ति ज्यादा देखी गई।

अमेरिकी लेखिका बेल हुक्स: अस्वस्थ सामाजिक अपेक्षाएं और इमोशनल मैनिपुलेशन महिलाओं को हिंसक बना सकता है।

कोविड-19 असर: लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा बढ़ी, और कई मामलों में महिलाएं भी अपराधी बनीं।

समाज क्यों चौंकता है?

भारतीय समाज में महिलाओं को त्याग, करुणा और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है। जब वही महिला हत्या जैसे अपराध करती है, तो सामाजिक मान्यताएं हिल जाती हैं।

क्या महिलाओं का स्वभाव बदल रहा है?

बदलती भूमिकाएं: आज महिलाएं नौकरी कर रही हैं, खुद फैसले ले रही हैं। यह नई भूमिका कभी-कभी अपराध की नई शक्ल भी ले रही है।

मीडिया और OTT का प्रभाव: फिल्मों, वेब सीरीज में महिलाओं को अपराध करते देखना उन्हें 'सामान्य' बना सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी: तनाव और इमोशनल अस्थिरता का इलाज नहीं मिलने से महिलाएं चरम कदम उठा रही हैं।

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