Holi Hai: कहीं होली के रंग अस्थमा मरीजों के लिए न बन जाए जानलेवा, जानें रंगों के त्योहार में कैसे बरतें सावधानी…

भोपाल। रंगों का त्योहार होली बिल्कुल करीब है। कोरोना के कारण इस साल होली का रंग जरूर फीका है लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में अभी भी लोग होली की तैयारियों में जुटे हैं। रंगों के इस त्योहार में रंगों से ही परहेज करना काफी मुश्किल होता है। अगर आप भी खूब रंगों के साथ होली मनाते हैं तो आपको यह भी जानना जरूरी है कि कहीं यहीं रंग अस्थमा मरीजों के लिए परेशानी का कारण न बन जाएं। रंगों में मौजूद हानिकारक तत्वों से अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। इतना ही नहीं अगर अनजाने में ही होली के रंग मुंह में चले जाएं तो अस्थमा का अटैक भी आ सकता है। साथ ही होलिका दहन से उठने वाला धुंआ और राख भी हवा में घुलकर परेशानी का सबब बन सकता है। ये धुंए और राख के कण फेफड़ों में प्रवेश कर अस्थमा के मरीजों की सांस लेना दूभर कर देते हैं। साथ ही होली के त्योहार में प्रयोग होने वाले रंगों में मौजूद जहरीला केमिकल और केरोसिन युक्त रंगों की बुरी गंध से अस्थमा अटैक आ सकता है। हालांकि अन सभी परेशानियों को जरा सी सावधानी बरतने के बाद नजरअंदाज किया जा सकता है।

इनसे करें परहेज…
अस्थमा के मरीजों को सूखे रंगों से होली खेलने पर परहेज करना चाहिए। सूखे रंगों में मौजूद हानिकारण कण काफी समय तक हवा में तैरते रहते हैं। यह कण मरीज के फेफड़ों में घुसकर सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकते हैं। होली के खेलने के लिए नेचुरल रंगों का प्रयोग किया जा सकता है। केमिकल वाले रंग अस्थमा के मीरजों के लिए नुकसानदेह साबुत हो सकते हैं। वहीं नेचुरल रंग अस्थमा के मरीजों के लिए उतने नुकसानदायक नहीं होते हैं। साथ ही अस्थमा के मरीजों को अपना इनहेलर साथ रखना चाहिए। ताकि रंगों के कारण सांस में दिक्कत आने पर काफी फायदा मिल सकता है। वहीं हेल्दी डाइट के साथ भी अस्थमा के मरीज
इस परेशानी से निपट सकते हैं।

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