कोविड टीकों को मंजूरी देने पर कुछ डाक्टरों व वैज्ञानिकों ने संदेह जताया

नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) भारत के दवा नियामक द्वारा कोविड-19 के दो टीकों को सीमित आपात उपयोग की मंजूरी दिये जाने के दो दिन बाद डॉक्टरों एवं वैज्ञानिकों के एक राष्ट्रीय संगठन ने मंगलवार को कहा कि उसे संदेह है कि ‘लाभ और राजनीतिक फायदा विज्ञान से आगे रहा।’’

‘प्रोग्रेसिव मेडिकोज एंड साइंटिस्ट फोरम’ (पीएमएसएफ) ने एक बयान में कहा कि भारत ने प्रभाव संबंधी डेटा के बिना टीकों को मंजूरी देने को लेकर चीन और रूस की तत्काल आलोचना की थी लेकिन ‘जब उसकी बारी आयी तब वह उस पैमाने पर खरा नहीं उतरा।’’

उसने कहा, ‘‘ यह संदेह करने के कई कारण हैं कि लाभ और राजनीतिक फायदा विज्ञान से आगे निकल गया है।’’

भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार कोविशील्ड और भारत बायोटेक द्वारा स्वदेशी रूप से तैयार कोवैक्सीन को देश में सीमित आपात उपयोग के लिए रविवार को मंजूरी दी थी और इससे विशाल टीकाकरण अभियान का मार्ग प्रशस्त हुआ था।

उद्योग विशेषज्ञों एवं कुछ विपक्षी नेताओं ने कोवैक्सीन पर तीसरे चरण के परीक्षण डेटा की अनुपस्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की थी। आलोचकों ने आगाह किया है कि ‘‘प्रक्रियाओं को दरकिनार करने और जल्दबाजी में मंजूरी देने से ’’ जिंदगियां खतरे में पड़ सकती हैं।

हालांकि भारत बायोटेक ने उसके कोविड-19 टीके को दवा नियामक द्वारा सीमित आपात उपयेाग के लिए मंजूरी दिये जाने को लेकर की जा रही आलोचना को खारिज कर दिया है। उसने कहा कि उसका सुरक्षित एवं प्रभावकारी टीके के निर्माण का रिकार्ड रहा है और वह सभी डेटा को लेकर पारदर्शी है।

भाषा

राजकुमार अविनाश

अविनाश

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