Snakes : सांप के नहीं होते कान, तो क्या ये सच में सुन सकते हैं या फिर होते हैं बहरे, जानें सच्चाई

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Snakes : सांप के नहीं होते कान, तो क्या ये सच में सुन सकते हैं या फिर होते हैं बहरे, जानें सच्चाई

नई दिल्ली। Snakes ये तो सभी जानते हैं कि सांप के कान नहीं होते। पर तो क्या ऐसे में सांप सुन पाते हैं। यदि हां तो ये कैसे संभव है....इन्हीं सब सवालों के जवाब जानने के लिए ऑस्ट्रेलिया में यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड science में वैज्ञानिकों द्वारा एक शोध Research किया गया। जिसमें मिले नतीजों से वैज्ञानिक भी हैरान हैं। जी हां इस शोध में शामिल हुई टॉक्सिनोलॉजिस्ट क्रिस्टीना जेडेनेक के अनुसार, सांप कमजोर और डरपोक जीव है, ये ज्यादातर समय छिपकर रहते हैं। टॉक्सिनोलॉजिस्ट क्रिस्टीना जेडेनेक कहती हैं कि अभी भी उनके बारे में बहुत कुछ सीखना बाकी है। तो चलिए जानते हैं कि सांपों के लेकर की गई इस रिसर्च में और क्या जानकारी सामने आई है।

मौजूद होते हैं ये अंग — Snakes
रिसर्च को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। साइंटिस्ट क्रिस्टीना के अनुसार सांप के कान उसके शरीर के बाहरी हिस्सों में नहीं होने के कारण लोग समझे हैं कि सांप बहरे होते हैं और वे सिर्फ जमीन पर होने वाली कंपन के जरिए ही चीजों को महसूस कर सकते हैं। जबकि स्थिति विपरीत है। शोधकर्ता का कहना है कि सांप बहरे नहीं होते। बस इसके सुनने की क्षमता बाकी शारीरिक इंद्रियों जैसे स्वाद और देखने की वजह से कमजोर होती है। स्लोवेनिया नेशनल चिड़ियाघर की वेबसाइट के अनुसार, भले ही सांपों में बाहरी कान न होते हों लेकिन कान के अंदर के सभी अंग उनमें मौजूद होते हैं।

ये था शोध का तरीका — Snakes
आपको बता दें 19 अलग-अलग प्रजाति के सांपों को विश्वविद्यालय द्वारा किए गए इस शोध में शामिल किया गया। इन सांपों में वे सभी सांप शामिल थे जो रेत, पेड़ और पानी पर चलते हैं। आपको बता दे क्रिस्टीन और उनके सहयोगियों ने इस शोध में ध्वनि की जो तीव्रता रखी थी वह 0 से 450 हर्ट्ज की थी। इस शोध में दो तरह की आवाजों को शामिल किया गया था। पहली आवाज जमीन के कंपन की थी। यानि धरती के कंपन जो आवाज पैदा होती है उसकी आवाज को शामिल किया गया। तो वहीं दूसरी आवाज वी थी जो हवा में आती है।

ये रहा था सांपों का रिएक्शन — Snakes
इस शोध के बाद जो सांपों की प्रतिक्रिया मिली उसके अनुसार एक ही प्रजाति के लोगों ने समान प्रतिक्रिया दी। लेकिन अलग—अलग समूहों द्वारा इस पर अलग—अलग रिएक्शन दिया गया। एक ही जीन वाले सांपों ने एक जैसी ही प्रतिक्रिया दी। शोधकर्ताओं की मानें तो इन सांपों में से सिर्फ वोमा अजगर ही आवाज के करीब जा रहा था। जबकि, बाकी सभी सांप इस आवाज से दूर जाने की कोशिश में थे। इतना ही नहीं शोध में एक और चीज सामने आई जिसके अनुसार फिलहाल अभी इस बारे में बहुत कम जानकारी मिली है जिससे पता चले कि दुनिया भर में सांपों की अधिकांश प्रजातियां कैसे बचाव करती हैं।

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