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Singhara ke Fayde: सिंघाड़ा पानी में उगने और फलने वाला एक मौसमी फल है। इसे सिंगोड़ा भी कहते हैं। अंग्रेजी में इसे ‘वाटर चेस्टनट’ (Water Chestnut) के नाम से जाना जाता है।
उच्च ऊर्जा से भरपूर यह खास फल पानी के भीतर होता है, जिसकी लत्तरें जल के सतह पर कुंभी की तैरती रहती हैं।
ऊर्जा और विटामिन का बढ़िया स्रोत है सिंघाड़ा
यूं तो यह फल ग्रामीण परिवेश का जाना-पहचाना फल है, जो उपवास के दिनों में बहुत खाया जाता है। लेकिन इसके फायदे को देखते हुए है, अब यह शहरों में भी काफी लोकप्रिय हो गया है।
उच्च कार्बोहाइड्रेट के कारण ऊर्जा से भरपूर और विभिन्न प्रकार के पोषण से भरपूर सिंघाड़ा विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स का बहुत बढ़िया स्रोत है।
इसलिए कहते हैं सिंघाड़ा को ‘पानी की रानी’
इस फल (सिंघाड़ा) का आकार एक त्रिकोण की तरह होता है, जो लगभग 4 से 6 सेंटीमीटर लंबी और चौड़ी होती है।
इसके दो ओर दो कांटे होते हैं, जो एक क्राउन (ताज) जैसा रूप देते हैं। पूर्णतः पानी में होने, अपने पोषक गुण और क्राउन जैसे आकार के कारण यह फल बतौर ‘पानी की रानी’ कहा जाता है।
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ऐसी होती है सिंघाड़ा का बनावट और स्वाद
सिंघाड़ा का बाहरी भाग कठोर होता है, एक तिकोने कटोरे की तरह। इसके मोटे और कठोर छिलके को हटाने पर अंदर से सफेद गुठली जैसा गूदा प्राप्त होता है।
यह नर्म और गूदेदार गुठली ही सिंघाड़े का खाने योग्य भाग है। इसका स्वाद हल्का पानीदार मीठा होता है।
इस सीजन में होता है सिंघाड़ा
सिंघाड़ा झीलों, तालाबों और दलदली क्षेत्रों में पाया जा सकता है। सिंघाड़ा का सीजन भारत में मुख्य रूप से अक्टूबर से मार्च तक होता है।
इसके फल की तब पैदावार शुरू होती है जब पानी में ठंडक आने लगती है। इस लिहाज से यह एक रबी फसल है।
फल एक, खाने के तरीके अनेक
सिंघाड़ा फल केवल कच्चा ही नहीं बल्कि कई तरह से खाया जाता है। इसे उबालकर, भूनकर या सलाद में डालकर खाया जाता है।
सिंघाड़े का आटा भी बनाया जाता है। इस रूप में इससे कई तरह की मिठाइयाँ और व्यंजन बनाए जाते हैं।
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व्रत और उपवास का फल है सिंघाड़ा
सिंघाड़ा भारत में व्रतों और उपवास के दौरान खाया जाने वाला एक बेहद लोकप्रिय फल है। इसका कारण है इसका सुपाच्य होना और शरीर को तुरंत ऊर्जा देना। इसका इस्तेमाल अनेक रूपों में होता है।
सिंघाड़ा के आटे से सिंघाड़ा कटलेट्स, सिंघारा टिक्की और सिंघाड़ा का हलवा सबसे अधिक बनाया जाता है। इसके आटे से स्वादिष्ट रोटियां भी बनती हैं। साथ ही इसका उपयोग डेस्सर्ट (Dessert) और केक बनाने भी होता है।
सिंघाड़ा के पोषक तत्व
सिंघाड़ा एक बेहद पौष्टिक फल है। यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज जैसे पोषक तत्वों से लबरेज फल है। अमूमन सिंघाड़े में जो विशेष पोषक तत्व पाए जाते हैं, वे हैं:
-- कैलोरी: 97 kcal/100 ग्राम
-- कार्बोहाइड्रेट: 24 ग्राम
-- आहारीय फाइबर: 3 ग्राम/100 ग्राम
-- प्रोटीन: 2 ग्राम/100 ग्राम
-- वसा: 0.1 ग्राम/100 ग्राम
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सिंघाड़ा से प्राप्त विटामिन और मिनरल
सिंघाड़ा में पाए जाने वाले प्रमुख विटामिन और मिनरल इस प्रकार हैं:
-- विटामिन ए (Vitamin A): 12 प्रतिशत/100 ग्राम
-- विटामिन सी (Vitamin C): 15 प्रतिशत/100 ग्राम
-- विटामिन बी6 (Vitamin B6): 10 प्रतिशत/100 ग्राम
-- विटामिन ई (Vitamin E): 10 प्रतिशत/100 ग्राम
-- पोटैशियम (Potassium): 10 प्रतिशत/100 ग्राम
-- मैग्नीशियम (Magnesium): 10 प्रतिशत/100 ग्राम
-- फॉस्फोरस (Phosphorus): 10 प्रतिशत/100 ग्राम
-- जिंक (Zinc): 10 प्रतिशत/100 ग्राम
विटामिन और मिनरल से भरपूर और सुपाच्य होने के कारण सिंघाड़ा रोगियों और कमजोर व्यक्तियों के स्वास्थ्य को सुधारने में काफी मददगार होता है।
सिंघाड़ा खाने के फायदे
सिंघाड़ा केवल स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि एक पौष्टिक फल भी है। अपने पोषक तत्वों के कारण सिंघाड़ा स्वास्थ्य-लाभ का खजाना है। इसका नियमित सेवन करने से शरीर को विशेष स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं:
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मधुमेह (डायबिटीज) नियंत्रण: सिंघाड़े में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड में ग्लूकोज के लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसलिए डायबिटीज पेशेंट के लिए सिंघाड़ा काफी अच्छा विकल्प है।
इसका फाइबर कब्ज को दूर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।
उच्च रक्तचाप नियंत्रण: पोटैशियम से भरपूर सिंघाड़े के सेवन से ब्लड में सोडियम के लेवल को कम करने में मदद मिलती है, जो उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) को कंट्रोल करने में सहायता होता है।
हेल्दी हार्ट: पोटैशियम और मैग्नीशियम हार्ट (हृदय) को मजबूत बनाते हैं। सिंघाड़े में इन दोनों मिनरल्स (खनिज) की उचित मात्रा मौजूद होती है, जो हेल्दी हार्ट के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि ये रक्त वाहिकाओं में तनाव को कम करने में सहायता करते हैं।
इम्यून सिस्टम में मजबूती: सिंघाड़ा में जिंक और विटामिन C प्रचुर मात्रा में होता है। ये दोनों तत्त्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) की मजबूती के लिए लिए काफी अहम हैं।
कैंसर से बचाव: सिंघाड़े में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा भी काफी अधिक होती है। एंटीऑक्सिडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं और शरीर को अनेक प्रकार कैंसर होने से बचाव करते हैं।
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