Shrikrishna Janmashtami: मप्र के इन शहरों में श्रीकृष्ण के अलौकिक मंदिर, जानिए क्‍या है रहस्य?

स साल 6 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्‍यौहार मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों में धूमधाम के साथ विभिन्‍न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

Shrikrishna Janmashtami: मप्र के इन शहरों में श्रीकृष्ण के अलौकिक मंदिर, जानिए क्‍या है रहस्य?

Shrikrishna Janmashtami: इस साल 6 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्‍यौहार मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों में धूमधाम के साथ विभिन्‍न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस लेख में हम मध्‍यप्रदेश के अलग- अलग शहरों में बने श्रीकृष्ण के मंदिरों के बारे में बात करेंगे।

यहां होती है ज्ञान रूपी स्‍वरूप की पूजा

राजधानी भोपाल में भगवान श्री कृष्ण का ऐसा मंदिन है, जहां ज्ञान रूपी स्वरूप की पूजा की जाती है। महंत ने बताया कि इस मंदिर में मूर्ति नहीं बल्कि भगवान के ज्ञान की पूजा की जाती है। साथ ही मूर्ति के स्थान पर श्री कृष्ण के जीवन और ज्ञान को समेटे हुए ग्रंथ को रखा गया है।

बतादें कि इस मंदिर में ज्ञान रूपी भगवान श्री कृष्ण को पीले रंग की पोशाक पहनाई जाती है। वहीं ग्रंथ के साथ श्री कृष्ण को मुकुट और मुरली भी पहनाई गई है।

इस मंदिर में रखे हैं श्री कृष्ण के वस्त्र

जबलपुर में भगवान श्री कृष्‍ण का ऐसा मंदिर है, जहां मंदिर के महंत का दावा है कि इस मंदिर में श्री कृष्‍ण के वस्‍तों के टुकड़े रखे हैं। साथ ही भगवान श्री कृष्ण के 1650 तीर्थों में से 60 तीर्थ स्थलों की शिलाएं भी यहां मौजूद हैं। बतादें कि यह मंदिर 'बाई का बगीचा' के नाम से जाना जाता है।

इस मंदिर में मीराबाई के साथ विराजमान है श्री कृष्ण

भगवान कष्ण को बलराज जी के साथ विराजमान तो देखा होगा। लेकिन मध्‍यप्रदेश के उज्जैन शहर में भगवान कृष्‍ण का ऐसा अनूठा मंदिर है, जहां भक्‍त और भगवान के बीच प्रेम दर्शाया गया है। मक्सी रोड पर पंवासा में स्‍थित इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण भक्त मीराबाई के साथ विराजमान हैं।

ऐसे मंदिर देश भर में मात्र दो हैं

देशभर में श्रीकृष्ण के मंदिर राधा के साथ बांसुरी बजाते हुए है। इनके अलावा माखन चोरी करते हुए बनाए गए हैं। लेकिन गीता का ज्ञान देते हुए मंदिर देशभर में मात्र दो हैं। पहला मंदिर कुरुक्षेत्र में है जहां अर्जुन को भगवान ने गीता का ज्ञान दिया था।  वहीं दूसरा मंदिर मध्यप्रदेश के रतलाम में है।

इस मंदिर के बनने की कथा है दिलचस्‍प

रतलाम में बने मंदिर की गाथा भी दिलचस्प है। इससे जुड़े भक्तों के मुताबिक लगभग 71 साल पहले शहर के एक कोयला ठेकेदार ने मंदिर का निर्माण कराया था।

मंदिर के पुजारी की माने तो चेतन जोशी भगवान कृष्‍ण के परम भक्‍त थे। उन्‍हे जब ट्रेन से जाने के लिए टिकट नहीं मिल था, तो उन्होंने रतलाम में ही मंदिर का निर्माण करा दिया था। जन्माष्टमी के दिन यहां सुबह से लेकर रात तक विभिन्‍न आयोजन होते हैं।

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