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Manipur violence: बुधवार को आदिवासियों के प्रदर्शन के दौरान मणिपुर जलने लगा। जिसके बाद स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए 8 जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। आर्मी और असम राइफल्स की 55 टुकड़ियों को स्थिति से निपटने के लिए तैनात किया गया है। इसी बीच मणिपुर ने राज्य में दंगाईयों को रोकने के लिए गोली मारने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही राज्य में अगले 5 दिनों के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।
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मणिपुर की स्थिति से निपटने के लिए RAF की पांच कंपनियों को इंफाल एयरलिफ्ट किया गया है, जबकि 15 अन्य जनरल ड्यूटी कंपनियों को भी राज्य में तैनाती के लिए तैयार रहने को कहा गया है। उधर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से पूर्वोत्तर राज्य के हालत की जानकारी ली है।
9000 लोगों को राहत कैंपों में शिफ्ट किया गया
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9000 लोगों को राहत कैंपों में शिफ्ट किया गया[/caption]
जानकारी के अनुसार, अब तक 9,000 लोगों को सुरक्षा बलों ने हिंसा प्रभावित इलाकों से बचाया है और उन्हें राहत कैंपों में शिफ्ट किया है। इसके साथ ही लगभग 5,000 लोगों को हिंसा ग्रस्त क्षेत्रों से चुड़ाचांदपुर में सुरक्षित घरों में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके अलावा 2,000 लोगों को इंफाल घाटी में और 2,000 लोगों को तेनुगोपाल जिले के सीमावर्ती शहर मोरेह में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने बुधवार को राज्य के दस पहाड़ी जिलों में गैर-आदिवासी मेइती की एसटी दर्जे की मांग के विरोध में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया।
पुलिस के अनुसार, चूड़ाचंदपुर जिले के तोरबुंग क्षेत्र में मार्च के दौरान, एक सशस्त्र भीड़ ने कथित तौर पर मेइती समुदाय के लोगों पर हमला किया, जिसके कारण घाटी के जिलों में जवाबी हमले हुए, जिसने पूरे राज्य में हिंसा को बढ़ा दिया। बताया गया कि टोरबंग में तीन घंटे से अधिक समय तक चली आगजनी में कई दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई।
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हिंसा में कई लोगों के मारे जाने का अंदेशा जताया जा रही है। हालांकि, अभी मौतों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने लोगों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हिंसा समाज में ''गलतफहमी'' का नतीजा है।
इन जिलों में लगाया गया कर्फ्यू
बता दें कि मैतेई बहुल इंफाल पश्चिम, काकचिंग, थौबल, जिरिबाम और बिष्णुपुर जिलों और आदिवासी बहुल चूड़ाचंदपुर, कांगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
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