Sheesh Mahal Jaipur: वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है शीश महल, ये नहीं देखा तो क्या देखा

Sheesh Mahal Jaipur: गुलाबी शहर में राजस्थान के कुछ बेहतरीन शाही महल हैं, जिनमें से एक शीश महल है, जो बेहतरीन झलक प्रदान करता है।

Sheesh Mahal Jaipur: वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है शीश महल, ये नहीं देखा तो क्या देखा

Sheesh Mahal Jaipur: गुलाबी शहर में राजस्थान के कुछ बेहतरीन शाही महल हैं, जिनमें से एक शीश महल है। बेहद भव्य सजावट और वास्तुकला की सुंदरता से बना शीश महल हमें शाही कलात्मकता और सौंदर्यशास्त्र के प्रति प्रेम की झलक प्रदान करता है।

महल का निर्माण राजस्थानी वास्तुकला पर इस्लामी स्थापत्य प्रभाव का एक अद्भुत नमूना है। यह शाही महल इस्लामी शैली और राजपूतों का एकदम सही मिश्रण है।

शीश महल कहां स्थित है?

शीश महल, जिसे दर्पण महल भी कहा जाता है, सुंदर हस्तनिर्मित चित्रों, कीमती पत्थरों और कांच से निर्मित वास्तुकला का एक शानदार नमूना है। यह आमेर किले का सबसे लोकप्रिय और खूबसूरत हिस्सा है। यह आमेर, जयपुर में स्थित है।

शीश महल का इतिहास । शीश महल किसने बनवाया?

यह महल 16वीं शताब्दी में राजा मान सिंह द्वारा बनवाया गया था, जो 1727 में पूरा हुआ। इस महल को बॉलीवुड की प्रसिद्ध फिल्म "मुगल-ए-आजम" के मशहूर गाने "जब प्यार किया तो डरना क्या" के लिए भी जाना जाता है।

इसे शीश महल में प्रसिद्ध अभिनेत्री मधुबाला पर फिल्माया गया था, जिन्होंने फिल्म में "अनारकली" की भूमिका निभाई थी।

हॉल की दीवार और छत पर सुंदर पेंटिंग और फूल उकेरे गए हैं, जो शुद्ध कांच और कीमती पत्थर से बने थे। इसकी सीलिंग ग्लास का प्लेसमेंट अद्भुत है।

इस महल में कोई दो मोमबत्तियां जलाता है तो उसका प्रतिबिंब उस छोटी सी रोशनी को हजारों तारों में बदल देता है, जो अद्भुत लगती है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस समय भारत में वास्तुकला का स्तर क्या था।

शीश महल को कांच से क्यों बनवाया गया?

इस महल को कांच से क्यों बनवाया गया इसके पीछे का कारण यह है कि प्राचीन काल में रानी को खुली हवा में सोने की इजाजत नहीं थी लेकिन उन्हें सोते समय तारे देखना पसंद था।

इसलिए राजा ने अपने वास्तुकारों को उस प्रकार का महल बनाने का आदेश दिया, जो इस समस्या का समाधान कर सके।

वास्तुकारों ने शीश महल का निर्माण किया, जो पत्थरों और कांच से बनाया गया। रात में कांच में दो मोमबत्तियों का प्रतिबिंब पूरे कमरे में सितारों जैसा दिखता था।

आजकल शीश महल में प्रवेश प्रतिबंधित है। हालांकि बाहर से हम शीश महल में कांच की सुंदर कलाकृति देख सकते हैं और छत की ओर इशारा करते हुए फ्लैश लाइट के साथ हम आसानी से सुबह के तारे देख सकते हैं।

शीश महल प्रवेश शुल्क :

भारतीयों के लिए प्रति व्यक्ति 10 रु

विदेशी पर्यटकों के लिए प्रति व्यक्ति 50 रु

स्टिल कैमरा के लिए 50 (भारतीय)

स्टिल कैमरा (विदेशी) के लिए 70 रुपये

वीडियो कैमरा के लिए 100 (भारतीय)

वीडियो कैमरा के लिए 100 रुपये (विदेशी)

हालांकि कीमतें कुछ भिन्न हो सकती हैं।

शीश महल का समय

शीश महल में पर्यटन के लिए सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 तक का समय निर्धारित किया गया है।

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