Shardiya Navratri Day 5 : आज है दो तिथियों का संगम, ऐसे करें मां स्कंदमाता और कात्यायनी मां का पूजन

Shardiya Navratri Day 5 : आज है दो तिथियों का संगम, ऐसे करें मां स्कंदमाता और कात्यायनी मां का पूजन shardiya-navratri-day-5-today-is-the-confluence-of-two-dates-worship-mother-skandmata-and-katyayani-like-this

Shardiya Navratri Day 5 : आज है दो तिथियों का संगम, ऐसे करें मां स्कंदमाता और कात्यायनी मां का पूजन

नई दिल्ली। इस बार शारदीय नवरात्री की मुख्य Shardiya Navratri Day 5 बात यह है कि दो तिथियों का एक साथ संगम हो रहा है। वह दिन आज यानि सोमवार को है। आज मां स्कंदमाता और षष्टी तिथि यानि मां कात्यायनी का पूजन किया जाएगा। आइए जानते हैं कैसे करें मां का पूजन।

ऐसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप
मां स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान हैं। मां की इसी विशेषता के कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहते हैं। मां का वाहन सिंह है। इतना ही नहीं मां स्कंदमाता को ही पार्वती एवं उमा नाम से भी जानते हैं। अगर मां स्कंद माता की पूरे मन से पूजा की जाए तो नि:संतानों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद माता जरूर देती हैं। मां स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं।

मां स्कंदमाता को श्वेत रंग है पसंद
अगर आप मां स्कंदमाता की उपासना करते हैं तो इससे आपको सुख की अनु​भूति होती है। चूंकि मां स्कंदमाता को सफेद रंग बेहद प्रिय है। इसलिए इस दिन मां के पूजन में श्वेत रंग का उपयोग या आपके द्वारा पहने जा रहे कपड़ा में श्वेत कपड़ो का उपयोग जरूर करें।

ऐसे करें मां कात्यायनी का पूजन

मां दुर्गा के छठे रूप को मां कात्यायनी कहता हैं। नवरात्रि के छठें दिन या षष्ठी के दिन मां कात्यायनी का पूजन किया जाता है। चूंकि इस वर्ष पंचमी और षष्टी 11 अक्टूबर है। मां का कात्ययनी इसलिए पड़ा क्योंकि वे कात्यायन ऋषि की पुत्री हैं। पौराणिक कथा में वर्णनानुसार कात्यायनी माता ने महिषासुर और शुंभ-निशुंभ राक्षसों का वध किया था। शक्तिशाली बनने के उद्देश्य से मां कात्यायानी की पूजा की जाती है। इनसे शत्रु संहार की शक्ति मिलती है। अगर नि:सतानों को संतान प्राप्ति का वर मिलता है।

मां कात्यायनी की पूजन विधि और मंत्र....

मां कात्यायनी को शहद है पसंद

इस दिन प्रातः काल में स्नान से निवृत्त होकर मां की प्रतिमा की स्थापित कर पूजन करें। मां का गंगा जल से आचमन करके रोली, अक्षत चढ़ाएं। धूप, दीप से पूजा करें। मां कात्यायानी को गुड़हल पसंद हैं। सुहाग का सामान अर्पित करें। फिर दुर्गा सप्तशती, कवच और दुर्गा चलीसा का पाठ करें। मां कात्यायनी के मंत्रों का जाप कर आखिरी में करें। मां कात्यायनी को शहद पसंद है अत: शहद का भोग जरूर लगाएं।

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