Shardiya Navratri 2025: क्या हैं कलश स्थापना के नियम, नारियल खड़ा रखना चाहिए या आड़ा, सामने रखें या बाजू में,जानें सबकुछ

Shardiya -Navratri-2025-Kalash-Sthapna-Niyam-Nariyam-ki-Disha: क्या हैं कलश स्थापना के नियम, नारियल खड़ा रखना चाहिए या आड़ा, सामने रखें या बाजू, जानें सबकुछ Shardiya -Navratri-2025-Kalash-Sthapna-Niyam-Nariyam-ki-Disha jyotish upay tithi muhurat date time astrology hindi news pds:

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Shardiya Navratri 2025 Kalash Sthapna Niyam Nariyam ki Sahi Disha: पितृपक्ष की समाप्ति के बाद 22 सितंबर सोमवार से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने रही है। घर के साथ—साथ पं​डालों में माता रानी की झांकियां सजाई जाएंगी।

ऐसे में यदि आप भी घर कलश स्थापना करने वाले हैं तो चलिए जानते हैं कि घर पर कलश स्थापना (Kalash Sthapna Niyam) के लिए क्या हैं, कलश रखने की सही दिशा क्या है, नारियल खड़ा रखना चाहिए या आड़ा, एश्वर्य प्राप्ति के लिए नवरात्रि में कौन से उपाय करना चाहिए, जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री से।

कलश में नारियल खड़ा रखना चाहिए या आड़ा

क्रमांकनियम / विधि
1नारियल हमेशा माता रानी के सम्मुख चौकी के ठीक सामने रखा जाना चाहिए।
2नारियल हमेशा आड़ा (sideways) रखा जाए और उसकी जटाएं अपनी ओर हों।
3सबसे पहले एक कलश में जल भरें।
4फिर चावल रखकर उस पर एक जल से भरा कलश रखें।
5इस पर एक कटोरी में चावल रखकर उस पर लाल कपड़े से बंधा नारियल रखें।

बाती वाले कलश स्थापना के नियम

  • मां दुर्गा की स्थापना के लिए जो बाती वाला कलश रखते हैं वह हमेशा माता रानी के दांई ओर और अपने ओर रखा जाना चाहिए।
  • इसके लिए जमीन पर चावल रखकर , उस पर शुद्धजल मिला, हल्दी, सिक्का डला हुआ कलश रखें।
  • फिर इस पर दो बाती वाला दीपक रखें।

22 सितंबर को उ. फाल्गुनी नक्षत्र में स्थापना मुहूर्त

वृश्चिक लग्न में पूजा और स्थापना मुहूर्त 

सुबह के मुहूर्त

अमृत योग — 6 से 7:30

स्थिर लग्न और अभिजीत मुहूर्त — 10:05 से 12:22

शाम के मुहूर्त

लाभ योग — 3 से 4:30

अमृत योग — शाम 4:30 से 6 बजे तक

pandit ram govind shastri

शारदीय नवरात्रि की तिथियां

तिथिवारतिथि/दिवस
22 सितंबररविवारपरमा
23 सितंबरसोमवारदोज
24 सितंबरमंगलवारतीज
25 सितंबरबुधवारचौथ
26 सितंबरशुक्रवारचौथ
27 सितंबरशनिवारपंचमी
28 सितंबररविवारषष्ठी
29 सितंबरसोमवारसप्तमी
30 सितंबरमंगलवारअष्टमी
1 अक्टूबरबुधवारनवमी
2 अक्टूबरगुरुवारदशमी (दशहरा)

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