Shardiya Navratri 2021 : मनोकामना महाकाली ऐसीं, कि स्थापना की बुकिंग के लिए करना होगा 2056 का इंतजार

अमित सोनी की रिपोर्ट
जबलपुर। नवरात्री का पावन पर्व चल Shardiya Navratri 2021 रहा है पर ऐसे में हम आपको ऐसी मां से रूबरू कराते हैं जहां  मनोकामना होने पर लोग मां की झांकी स्थापना का पूरा खर्च उठाते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं जबलपुर के रांझी में हर साल नवरात्रि पर लगने वाली मनोकामना  महाकाली की स्थापना की। इसकी मान्यता इतनी है कि प्रतिमा स्थापना के लिए 2056 तक की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। अगर आप भी यहां स्थापना करना चाहते हैं तो इसके लिए अब आपको अभी 35 साल का इंतजार करना होगा। ऐसा कहा जाता है कि सर्व प्रथम प्रतिमा का निर्माण 1997 में बच्चों ​ने किया था।

शारदीय नवरात्रि के मौके पर जबलपुर संस्कारधानी में जगह जगह मां की प्रतिमाएं पंडालों में विराजी हैं। ऐसी ही विशेष मान्यताओं वाली मनोकामना महाकाली की हर वर्ष शारदीय नवरात्रि के मौके पर विधि विधान से स्थापना की जाती है। लगातार 25 वर्षों से मनोकामना वाली महाकाली की प्रतिमा स्थापना का क्रम अभी भी जारी है। मां के प्रति भक्तों की आस्था इस कदर समझी जा सकती है कि 2056 तक प्रतिमा स्थापना का खर्चा तक भक्त एडवांस लेकर बैठे हैं। लेकिन उन्हें अपना मौका नहीं मिल पा रहा है।  वही भक्त हैं जिनकी मनोकामना को मां काली ने पूरा किया है।

 

भक्तों ने दिया है मां को नाम
माता महाकाली को मनोकामना वाली महाकाली का नाम किसी और ने नहीं बल्कि स्वयं भक्तों ने उनका ही नाम प्रचलित किया है। इस नाम के पीछे कई चमत्कारिक घटनाए जुड़ी हुई हैं। कहते हैं मां के दर्शन करने जो भी भक्त आया और मनोकामना मांगी हैं। मां ने उस भक्त की हर मनोकामना को पूरा किया और सिलसिला आगे चलता गया। हर साल जबलपुर के रांझी क्षेत्र में मां की विशालकाय प्रतिमा स्थापित की जाती है। 9 दिन तक पूजा अनुष्ठान का दौर चलता है। प्रतिमा स्थापना के लिए 2038 तक इसकी बुकिंग हो चुकी है। भक्तों ने इसकी राशि भी जमा कर दी है। अब जो भक्त बुकिंग करना चाहते हैं उनके लिए 2056 तक प्रतिमा स्थापना के लिए वेटिंग चल रही है।

कीमती आभूषणों होते हैं कन्याओं को दान
मां को हर साल सोने और चांदी के जेवर चढ़ाए जाते हैं। इन आभूषणों को नवमीं पर भंडारे के बाद गरीब बच्चियों को दान ​दिया जाता है। इसके अलावा जो भी दान आता है। उससे गरीब लड़कियों का विवाह कराया जाता है। समिति के महंत का कहना है कि यह सिलसिला पिछले करीब 24 वर्षों यानि वर्ष 1997 से निरंतर जारी है।

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password