Shajapur News: उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए कलेक्टर ने लगाया धारा 144 के तहत प्रतिबंध

Shajapur News: उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए कलेक्टर ने लगाया धारा 144 के तहत प्रतिबंध

शाजापुर /आदित्य शर्मा की रिपोर्ट। शाजापुर में शासन के द्वारा सभी उर्वरकों की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करायी जा रही है परन्तु निचले स्तर पर अपारदर्शिता, कालाबाजारी तथा उच्च मूल्य पर विक्रय की स्थितियां न बने तथा इस कारण किसानों में असंतोष व कानून व्यवस्था की स्थिति न निर्मित हो, इसके लिए कलेक्टर दिनेश जैन ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये है।

कलेक्टर दिनेश जैन द्वारा जारी आदेश के मुताबिक सभी सेवा सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं द्वारा दुकान के बाहर प्रत्येक का उर्वरकवार प्रतिदिन का ओपनिंग स्टॉक एवं उर्वरक की दर स्पष्ट रूप से दर्शनीय स्थल पर प्रदर्शित करें। सहकारी समितियो तथा निजी विक्रेताओं द्वारा कृषको को बिल अनिवार्य रूप से दें। सहकारी समितियो तथा निजी विक्रेताओं द्वारा उर्वरको का विक्रय पी.ओ.एस. मशीन द्वारा ही किया करे। साथ ही तथा सुनिश्चित हो कि पी.ओ.एस. मशीन पर प्रदर्शित हो रही उर्वरको की मात्रा का भौतिक रूप से उपलब्ध उर्वरको की मात्रा से मिलान हो। सेवा सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरको विक्रेताओं द्वारा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 का पालन सुनिश्चित करें।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष रबी 2022-23 में गेहूं 201900 हेक्टेयर एवं दलहन 51900 हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी होने की संभावना है। बोनी कार्य निरंतर जारी है। अभी तक लगभग 52 प्रतिशत बोनी का कार्य हो चुका है तथा आगे बोनी कार्य में और तेजी आयेगी। मैदानी अधिकारी एवं कर्मचारी से प्राप्त हो रही सूचना अनुसार जिले में कृषको द्वारा उर्वरको की मांग निरंतर बढ़ रही हैं। भविष्य में उर्वरको की मांग में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है।

यह आदेश दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 (1) के अंतर्गत एक पक्षीय पारित किया गया है। कोई भी व्यक्ति इस संबंध में अपनी आपत्ति याआवेदन दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 (5) के अंतर्गत प्रस्तुत कर सकता है। पूर्व से प्रचलित अन्य प्रतिबंधात्मक आदेशों के प्रावधान पूर्ववत लागू रहेगें। इस आदेश का उल्लंघन होने पर संबंधित सेवा सहकारी समितियो एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं के विरूद्ध चोर बाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम 1980 तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध माना जाकर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

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