Scrub typhus in MP : सावधान! प्रदेश में सक्रब टाइफस की दस्तक! जानिए क्या हैं लक्षण और बचाव का तरीका

scrub typhus

भोपाल। लोग कोरोना के scrub typhus in MP खौफ से उबरे नहीं हैं कि इसी ​बीच एक और बीमारी ने अपनी दस्तक दे दी है। जी हां अब प्रदेश में खतरनाक स्क्रब टाइफस scrub typhus बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। मध्य प्रदेश के जिलों रायसेन, नरसिंहपुर, सतना, दमोह और कटनी में स्क्रब टाइफस के लगभग 9 मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसको लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। जानकारों के अनुसार यह बीमारी जुलाई से लेकर दिसंबर तक अधिक फैलती है।
इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने गाइडलाइन भी जारी कर दी है। डॉक्टरों के माने तो यह बीमारी छछुन्दर, चूहे, गिलहरी आदि से फैलती है। इसलिए चेतावनी दी गई है कि इनके द्वारा कुतरे हुए फल या खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल भी न करें। यह बीमारी सामान्य रूप से ओरिएटिया सुसुगैमुशी नाम के जीवाणु के कारण होती है। जो कि चूहों में पाया जाता है।

क्या है स्क्रब टाइफस?
इस बीमारी की बात करें तो सीडीसी (Centers for Disease Control and Prevention) के मुताबिक स्क्रब टाइफस एक ऐसी बीमारी है जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी (Orientia tsutsugamushi) नाम के बैक्टीरिया से होती है। इसे बुश टाइफस के नाम से भी जानते हैं। इसके संक्रमण का मुख्य कारण चिगर्स (लार्वा माइट्स) है। जिसके काटने से लोगों में फैलने लगता है।

क्या हैं स्क्रब टाइफस के लक्षण
इस बीमारी के कुछ लक्षण हैं। जिनके शरीर में दिखते ही आपको सतर्क रहना होगा। आइए जानते हैं क्या हैं वे लक्षण।

— बुखार, शरीर में दाने
— सूखे चकत्ते भी
— सिर दर्द
— खांसी
— जी मितलाना
— उल्टी होना
— मांसपेशियों में दर्द
— सांस फूलना

ये हैं बचाव के तरीके
– इस बीमारी के लिए सबसे अधिक जरूरी है कि संक्रमित लोगों से संपर्क में न रहें। जहां तक संभव हो उनसे दूरी बनाए रखें।
– जिस जगह पर सामान्य रूप से स्क्रब टाइफस फैला है, वहां जाने से बचें।
— जिस स्थान पर बहुत सारी वन​स्पति पर झाड़िया लगी हैं वहां पर जाने से बचें।क्योंकि वहां भी चिगर पाए जा सकते हैं।
– पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) -पंजीकृत कीट विकर्षक बाहरी आइकन का उपयोग करें जिसमें डीईईटी या अन्य सक्रिय तत्व शामिल हों, जो उजागर त्वचा और कपड़ों पर चिगर्स के खिलाफ उपयोग के लिए रिस्टर्ड हों।
-कपड़ों को पहनने की साइड से रिपिलेंट (repellent) यानी कीड़ों को भगाने वाली दवाओं का छिड़काव न (repellent) करें।
– अगर आप भी सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो repellent लगाने से पहले सनस्क्रीन लगाएं।
-बच्चों को फुल बांह वाले कपड़े पहनाएं। ताकि उनके हाथ और पैर ढंके रहें। छोटे बच्चों को जहां तक संभव हो सके मच्छरदानी के अंदर रखें।
– बच्चे के हाथों, आंखों या मुंह पर या कट वाली त्वचा पर कीट विकर्षक न लगाएं।
– बच्चों की त्वचा पर सीधे तौर पर इसका छिड़काव न करें। पहले अपने हाथों पर लगाएं फिर बच्चे के चेहरे पर लगाएं।

इलाज की गाइडलाइन

 व्यस्कों के लिए
— डॉक्सीसिलीन 200 एमजी रोजाना।
— एजिथ्रोमाइसिन 500 एमजी कम से कम पांच दिन ।

 बच्चों के लिए
— डॉक्सीसिलीन 4.5 एमजी प्रति किलो रोज के हिसाब से।
— एजिथ्रोमाइसिन 10 एमजी प्रति किलो 5 दिन

 गर्भवती महिलाओं के लिए
— एजिथ्रोमाइसिन 500 एमजी 5 पांच दिन।

(नोट : इस लेख में दिए गए तत्थ सामान्य सूचनाओं पर आधारित हैं। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता। किसी भी प्रकार की दवाइयों का उपयोग करने के लिए अपने चिकित्सक जरूर संपर्क करें।)

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