SC-ST Creamy layer Case Update: IAS-IPS के बच्चों को आरक्षण नहीं देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बड़ी बात

SC-ST Creamy layer Case Update: आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान को 75 वर्ष हो चुके हैं और आरक्षण लागू करने वाली विधायिका और कार्यपालिका को यह समझना चाहिए कि आरक्षण का लाभार्थी कौन होगा और कौन नहीं।

SC ST Creamy layer Case Update Supreme Court IAS IPS

SC-ST Creamy layer Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण से 'क्रीमी लेयर' को बाहर रखना सरकार और विधायिका का काम है, न्यायालय का नहीं। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस अजय मसीह की युगल पीठ ने ये भी कहा कि अदालत इस संबंध में विधायिका और सरकार को सीधे निर्देश जारी नहीं कर सकती।

नियुक्तियों में आरक्षण का फायदा

भोपाल के संतोष मालवीय ने याचिका दायर करके कहा प्रदेशभर में 21 विभागों द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों में IAS, IPS और वर्ग एक के सभी अधिकारियों के बच्चों और आश्रितों को किसी भी तरह के आरक्षण का फायदा नहीं दिया जाए, क्योंकि वे क्रीमी लेयर में आते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने दलील दी कि ये बच्चे आरक्षण का फायदा उठाने के कारण सामाजिक और शिक्षित तौर पर विकसित हो चुके हैं, अब उन्हें आरक्षण की आवश्यकता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था ?

[caption id="attachment_734802" align="alignnone" width="535"]Supreme Court IAS IPS सुप्रीम कोर्ट[/caption]

सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक पीठ ने 1 अगस्त 2024 को पंजाब राज्य बनाम दविन्दर सिंह के मामले में आदेश दिए थे कि अजा-जजा आरक्षण में भी 'क्रीमी लेयर' सिद्धांत को लागू किया जाए। 'क्रीमी लेयर' लागू करते हुए जिन-जिन परिवारों ने इसका फायदा उठाकर अपने सामाजिक और शिक्षित स्तर को बेहतर कर दिया है, उनको आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाए। शीर्ष अदालत ने ये भी कहा था कि IAS, IPS और ऐसे सभी वरिष्ठ शासकीय सेवाओं में जो आरक्षण का लाभ पा चुके सरकारी अफसर हैं, उनके बच्चों और आश्रितों को आरक्षण का लाभ देना अनुचित होगा।

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जस्टिस गवई की बेंच ने और क्या कहा ?

सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई की पीठ ने कहा कि संविधान को 75 वर्ष हो चुके हैं और आरक्षण लागू करने वाली विधायिका और कार्यपालिका को यह समझना चाहिए कि आरक्षण का लाभार्थी कौन होगा और कौन नहीं। जो निर्णय संविधान पीठ द्वारा दिया गया उसमें इसलिए यह अभिमत जाहिर किया गया ताकि शासन और विधायिका इस बात को समझते हुए आरक्षण को उन्हीं व्यक्तियों तक पहुंचाए, जिनके लिए वह आवश्यक है, न कि उनको जो इसका पहले ही लाभ उठाकर काफी विकसित हो चुके हैं।

सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका को स्वीकार नहीं करने की इच्छा जाहिर की। इस पर याचिकाकर्ता ने ये कहते हुए याचिका वापस ले ली कि इस संबंध में राज्य सरकार को अभ्यावेदन देंगे।

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