Last Sawan Somwar 2025: उज्जैन में धूमधाम से निकली बाबा महाकाल की सवारी, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश स्वरूप में दिए दर्शन

Last Sawan Somwar 2025: उज्जैन में धूमधाम से निकली बाबा महाकाल की सवारी, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश स्वरूप में दिए दर्शन

हाइलाइट्स

  • सावन का अंतिम सोमवार, शिवालयों में लगा भक्तों का तांता।
  • उज्जैन में धूमधाम से निकाली गई बाबा महाकाल की सवारी।
  • सवारी में लोक नृत्य, पालकी और भजन मंडली का संगम।

Ujjain Baba Mahakal Sawari Last Sawan Somwar 2025: सावन माह के चौथे और अंतिम सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकाल की राजसी सवारी धूमधाम से निकाली गई। दिन की शुरुआत मंदिर सभा मंडप में भगवान की पालकी पूजन से हुई, जहां श्रद्धा और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। पालकी पूजन के बाद जब भगवान महाकालेश्वर की सवारी मंदिर के मुख्य द्वार से निकली, तो वहां मौजूद सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने पालकी में विराजित महाकाल को पूरे सम्मान के साथ सलामी दी। इस दौरान मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के नारों से गूंज उठा। साथ ही अन्य जिलों में भी सावन विशेष पूजा और कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया। publive-image

बाबा महाकाल के नगर भ्रमण का हर स्वरूप खास

सावन माह के अंतिम सोमवार शाम 4 बजे महाकाल भक्तों का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। सवारी में भगवान महाकाल ने विभिन्न स्वरूपों के भक्तों को दर्शन दिए, पालकी में श्री महाकालेश्वर, श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में, गजराज पर श्री मनमहेश रूप, गरुड रथ पर श्री शिव तांडव प्रतिमा, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश जी स्वरूप में भक्तों को दर्शन देने निकले। सावन की चौथी सवारी में भजन मंडलियों, झांझ वादन समूहों और लोक कलाकारों ने अपनी भक्ति-पूर्ण प्रस्तुतियों से वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। वहीं, घुड़सवार पुलिस, सशस्त्र बल, होमगार्ड जवानों और पुलिस बैंड ने सवारी को सुरक्षा और गरिमा के साथ आगे बढ़ाया। भक्तों ने पूरे उल्लास और आस्था के साथ भगवान महाकाल का दर्शन किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

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अंतिम सोमवार को महाकाल का अलौकिक श्रृंगार

सावन माह के अंतिम सोमवार की पवित्र सुबह उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्ति की लहरें उमड़ पड़ीं। तड़के ढाई बजे मंदिर के कपाट भस्म आरती के लिए खोले गए। सबसे पहले भगवान महाकाल को जल अर्पित कर भस्म रमाई गई और फिर दूध-दही से स्नान कराने के बाद पंचामृत अभिषेक पूजन हुआ। इसके बाद भगवान महाकाल का भांग, चंदन और दिव्य आभूषणों से राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। महाकाल का यह अद्भुत रूप देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

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दो लाख से अधिक भक्तों ने किए दर्शन

इस पावन अवसर पर दोपहर तक दो लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। भस्म आरती के दौरान चलायमान दर्शन व्यवस्था में कई ऐसे श्रद्धालु भी दर्शन कर पाए जिन्हें पहले अनुमति नहीं मिली थी। मंदिर परिसर ‘हर हर महादेव’ और ‘जय महाकाल’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

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शिवालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, निकाली कांवड़ यात्रा

सावन माह के चौथे और अंतिम सोमवार को पूरे प्रदेश में शिवभक्तों की आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। शहरों से लेकर गांवों तक के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। यहां 50,000 से अधिक भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना किए हैं। श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी रहा है।

इधर, रतलाम से सैलाना के केदारेश्वर महादेव मंदिर तक 'सांवरिया मित्र मंडल' ने भक्ति भाव से ओतप्रोत कांवड़ यात्रा निकाली। यात्रा मार्ग पर ‘बोल बम’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। इटारसी के पशुपतिनाथ धाम मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजन किया।

मंडला में भी कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों शिवभक्तों ने सहभागिता की। वहीं "नमामि नर्मदे महाआरती ट्रस्ट" द्वारा महिष्मती नर्मदेश्वर कांवड़ यात्रा भव्य रूप में निकाली गई, जो जनआस्था का प्रतीक बनी।

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