Sas-Bahu Temple : यहां बना है प्राचीन सास-बहू का मंदिर, बेहद दिलचस्प है मंदिर की कहानी

Sas-Bahu Temple : यहां बना है प्राचीन सास-बहू का मंदिर, बेहद दिलचस्प है मंदिर की कहानी

Sas-Bahu Temple : भारत को धार्मिक संस्कृति प्रधान देश माना जाता है, क्योंकि भारत में कई देवी देवताओं के मंदिर है जो अपने आप में अपनी पहचान रखते है। लेकिन क्या आपने कभी सास-बहु के मंदिर (SasBahu Temple) के बारे में सुना है। यह मंदिर राजस्थान के उदयपुर में स्थित है। इस मंदिर के बारे में कई दिलचस्प बाते है जो शायद ही कुछ लोगों को पता होगा। आज हम इसी मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जो सास-बहु मंदिर (SasBahu Temple) के नाम से प्रसिद्ध है।

भारत में ऐसे कई मंदिर है जिनके नाम सुनकर आप हैरान हो जाते है। जैसे की बुलेट मंदिर, शिवमंदिर, हनुमान मंदिर, लेकिन सास-बहु का मंदिर (SasBahu Temple) सुनकर आपके मन में सवाल उठता होगा की आखिर कैसा है ये मंदिर दरअसल, ये मंदिर राजस्थान के उदयपुर में स्थित है। मंदिर को सहस्त्रबाहु (SasBahu Temple) के नाम से जाना जाता है, लेकिन लोग इस मंदिर सास-बहु (SasBahu Temple) के नाम से जानते हैं। राजस्थान के उदयपुर शहर से करीब 23 किमी दूर नागदा गांव में यह मंदिर बना हुआ है। हालांकि ये सास और बहू (SasBahu Temple) से जुड़ा किसी भी तरह का मंदिर नहीं है। बल्कि कच्छवाहा राजवंश के राजा महिपाल ने इसे 10 वीं या 11 वीं शताब्दी ईस्वी में बनवाया था। आमतौर पर माना जाता है कि महिपाल की रानी भगवान विष्णु की भक्त थी। राजा ने अपनी प्यारी पत्नी के लिए एक मंदिर बनवाया, जिसमें वह अपने इष्ट देवता की पूजा कर सके। कुछ समय बाद रानी के पुत्र का विवाह हुआ, जो भगवान शिव की पूजा करती थी। तब राजा ने अपनी बहु के लिए भगवान शिव का मंदिर बनवाया था। जिसके बाद इसका नाम सहस्‍त्रबाहू कहा जाने लगा।

क्यों बोलते है सास-बहु का मंदिर

दरअसल, भगवान विष्णु के मंदिर का निर्माण पहले किया गया था, इसलिए इसका नाम सहस्त्रबाहु मंदिर रखा गया, जिसका अर्थ है हजारों भुजाओं वाला भगवान विष्णु का पर्यायवाची। हालांकि, बाद में, जुड़वां मंदिरों सहस्त्रबाहु कहा जाने लगा।.जैसे-जैसे समय बीतता गया, नाम को भी कुछ और ही तरह से लोग बुलाने लगे। समय के साथ इसे लोग सास-बहू मंदिर (SasBahu Temple) के नाम से बुलाने लगे। सास-बहू मंदिर पांच छोटे मंदिरों से घिरा हुआ है। सास मंदिर में एक तोरणद्वार है। इसके तीन दरवाजे तीन दिशाओं की ओर हैं, जबकि चौथा दरवाजा एक ऐसे कमरे में स्थित है जहां लोग नहीं जा सकते। मंदिर के प्रवेश द्वार पर, देवी सरस्वती, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु की मूर्तियां रखी गई हैं। मंदिर की दीवारों पर अद्भुत नक्काशी की गई है। लेकिन कई आक्रमणों और समय के प्रभाव के कारण, मंदिर के कुछ हिस्से खंडहर में हैं।

1100 साल पुराना है ये मंदिर

इस मंदिर का निर्माण 1100 साल पहले कच्‍छपघात राजवंश के राजा महिपाल और रत्नपाल ने बनवाया था। इस मंदिर (SasBahu Temple) में भगवान विष्णु की 32 मीटर ऊंची और 22 मीटर चौड़ी सौ भुजाओं वाली मूर्ती है। इतिहासकारों का मानना है कि भारत में मुगल आए थे, तो मुगलों ने सास-बहु मंदिर को चुने और रेत से ढकवाकर मंदिर पर कब्जा कर लिया था। मंदिर कई मूर्तियों को मुगलों ने खंडित कर दिया था। बाद में भारत में अंग्रेज आए और पूरे देश पर कब्जा करके इस मंदिर को वापस खुलवा दिया था।

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