CG News: सरकारी लापरवाही से कबाड़ हो रही बेटियों की साइकिलें, गरियाबंद में सरस्वती साइकिल योजना की असलियत उजागर, जानें

Gariaband News: गरियाबंद के मैनपुर ब्लॉक में सरस्वती साइकिल योजना के तहत भेजी गई छात्राओं की साइकिलें बारिश में भीगकर खराब हो गईं।

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हाइलाइट्स 

  • बारिश में सड़ गईं साइकिलें

  • शिक्षा विभाग पर उठे सवाल

  • स्कूल में टपकती छतें भी दोषी

Gariaband News: शिक्षा को प्रोत्साहन देने और बेटियों को स्कूल तक पहुंचने में सुविधा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही सरस्वती साइकिल योजना एक बार फिर सरकारी लापरवाही का शिकार हो गई है। गरियाबंद ज़िले के मैनपुर ब्लॉक में 1036 छात्राओं के लिए भेजी गई साइकिलें बारिश में भीगकर जंग खा गईं, जिससे उन बेटियों के सपनों पर पानी फिर गया जो इन साइकिलों के सहारे आगे बढ़ने का सपना देख रही थीं।

खुले आसमान के नीचे सपनों की सवारी

[caption id="attachment_903253" align="alignnone" width="1175"]Gariaband news बारिश में भींगती साइकिलें [/caption]

इस योजना के तहत मैनपुर ब्लॉक के 30 स्कूलों की छात्राओं को साइकिलें उपलब्ध कराई जानी थीं। इसके लिए हायर सेकेंडरी स्कूल के मैदान में हजारों साइकिलों के पार्ट्स ट्रकों से लाकर उतारे गए थे। लेकिन प्रशासन द्वारा समय पर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा, बारिश के चलते ये पार्ट्स खुले आसमान के नीचे भीगते रहे और देखते ही देखते सपनों की ये सवारियां जंग लगने लगीं।

चैनल की रिपोर्टिंग के बाद जागा शिक्षा विभाग

जब यह मामला मीडिया में आया और स्थानीय चैनलों ने इसे प्रमुखता से दिखाया, तो शिक्षा विभाग हरकत में आया। आनन-फानन में साइकिलों के पार्ट्स को स्कूलों के कमरों में शिफ्ट किया गया, लेकिन स्थिति वहां भी अलग नहीं थी। कई कमरों की छतें टपक रही थीं, जिससे भीगे हुए पार्ट्स और अधिक खराब हो गए। कुछ हिस्सों में तो पहले से ही जंग लगने के निशान दिखने लगे थे।

एक के ऊपर एक लादकर भेजी जा रही साइकिलें

अब विभाग की कोशिश है कि किसी तरह जल्द से जल्द साइकिलों को असेंबल कर छात्राओं तक पहुंचाया जाए। पिकअप वाहनों में 100 से 150 साइकिलें एक-दूसरे के ऊपर लादकर स्कूलों की ओर रवाना की जा रही हैं। उधर, जहां साइकिलें पड़ी थीं, उस स्थान को रेत डालकर समतल किया जा रहा है ताकि पानी की निकासी हो सके। लेकिन सवाल यह है कि इस क्षति की भरपाई कैसे होगी?

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क्या यही है योजना की ‘सफलता’?

जब इस मामले पर मैनपुर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी महेश पटेल से सवाल किया गया तो उनका बयान और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा, "सितंबर में आमतौर पर बारिश नहीं होती, हर साल इसी तरह साइकिल आती हैं और मैदान में रखी जाती हैं, लेकिन इस बार अचानक बारिश आ गई, इसलिए यह स्थिति बनी।" क्या इसी तरह की गैरजिम्मेदाराना सोच के साथ योजनाएं संचालित की जाएंगी? जब बच्चों का भविष्य दांव पर हो, तब "अचानक बारिश" जैसे तर्क देना क्या प्रशासनिक संवेदनहीनता नहीं है?

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