नरवाई के सस्ते वैज्ञानिक निपटान की अवश्यकता - सारिका घारू

नरवाई के सस्ते वैज्ञानिक निपटान की अवश्यकता - सारिका घारू Sarika Gharu resolved not to burn the narwhals and the need for their cheap scientific disposal vkj

नरवाई के सस्ते वैज्ञानिक निपटान की अवश्यकता - सारिका घारू

सूरज हुआ मद्धम, चांद जलने लगा ये गीत की पंक्तियां आज सच होती दिख रही हैं। नरवाई के धुंये ने जहां सूर्य को फीका कर दिया है तो रात में भी लपटो के कारण आसमान नारंगी दिख रहा है। थोड़ी सी असावधानी या तेज हवा का प्रकोप इसे गंभीर स्थिति में पहुंचा सकता है। यह बात नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने नरवाई को न जलाने का संदेश देने के जागरूकता कायर्क्रम में कही।

सारिका ने कहा कि तमाम सरकारी समझाईश और सजा की चेतावती के बाद भी मूंग के मोह के आगे कुछ किसान नरवाई के निपटारे के लिये आग का खेल खेलने से बच नहीं पा रहे है। प्रशासन की अपनी सीमायें होती हैं अतः सामूहिक निर्णय लेकर नरवाई को न जलाने का निणर्य लेना पड़ेगा। कार्यक्रम में ग्रामीण बच्चों को संबोधित करते हुये सारिका ने कहा कि वे अपने घरों में बड़ों से नरवाई न जलाने की जिद करें। नरवाई जलती खेत में है लेकिन इसका पयार्वरणीय दुष्परिणाम कई वर्ग कि.मी.तक फैलता है जिससे मनुष्य के अलावा पशुओं एवं अन्य सूक्ष्म जीवों को भी नुकसान पहुंचता है।

सारिका ने इस समस्या के स्थाई हल के लिये कृषि वैज्ञानिकों से रवी की फसलों में और कम अवधि की वैरायटी को विकसित करने की अवश्यकता बताई ताकि तीसरी फसल के लिये खेत तैयार करने कुछ और समय मिल सके। इसके साथ ही नरवाई के पर्यावरण मित्र निपटान के लिये और सस्ते उपाय खोजने की बात कही। सारिका ने आव्हान किया कि नरवाई न जलाने के संदेश को केवल नारे बोलने या सुनने के रूप में न लें बल्कि इसके पालन के लिये सामूहिक निणर्य लें।

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