इंदौर की तीन दृष्टिबाधित बहनों को प्रदेश कर रहा सलाम, पढ़िये उनकी सफलता की कहानी

Indore three sisters story

इंदौर। जरा सोचिए एक घर में तीन बेटियां जन्म लेती है और तीनों जन्म से ही दृष्टिबाधित रहती हैं। ऐसे में उनके लिए आगे का जीवन कितना कठिन होगा ये हम बस कल्पना कर सकते हैं। घर के आर्थिक हालत भी ऐसे कि पिता को घर चलाने के लिए ईंट भट्टे पर काम करना पड़ता है। मगर ये बेटियां आम नहीं थी, इनके अंदर अपने हालात को भी चीर देने की शक्ति थी। ऐसे में तीनों दृष्टबाधित बहनों ने अपने हालातों से सामना करते हुए राष्ट्रीय स्पर्धा में पदक हासिल कर अपने परिवार के साथ पूरे मप्र का नाम रोशन किया है।

मुख्य रूप से नर्मदापुरम की रहने वाली हैं तीनों बहने

इंदौर की रहने वाली सरिता चौरे, ज्योति चौरे और पूजा चौरे ने लखनऊ में संपन्न हुए राष्ट्रीय दृष्टिबादित और पैरा जूडो स्पर्दा में मप्र का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है। सरिता और ज्योति ने 48 किग्रा वजन वर्ग में जबकि बड़ी बहन पूजा ने 52 किग्रा वजन वर्ग में पदकीय सफलता हासिल की है। हालांकि तीनों बहने मुख्य रूप से नर्मदापुरम के समीप गांव पांजराकला की रहने वाली हैं और इस वक्त एक NGO की मदद से इंदौर के शासकीय माता जीजाबाई कालेज से बीए की पढ़ाई कर रही हैं।

भोपाल के कोच देते हैं ट्रेनिंग

बतादें कि तीनों बहनों में से सरिता 2009 में बर्मिंघम में कामनवेल्थ चैंपियनशिप में देश के लिए पदक भी जीत चुकी हैं। तीनों बहनों को भोपाल के कोच भगवान दास ट्रेनिंग देते हैं। वहीं पूजा भी पिछली चार राष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक जीत चुकी हैं। जबकि ज्योति ने भी दो राष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक हासिल किए हैं।

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