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सलकनपुर। Salkanpur Devi Mahalok Bhoomipoojan: उज्जैन महाकाल लोक के बाद अब सीहोर स्थित सलकनपुर में देवी महालोक का आज भूमिपूजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसका शिलान्यास करेंगे। आपको बता दें इसके लिए बीते तीन दिनों से चल रहे महोत्सव का समापन आज होगा। इस अवसर पर माता को चुनरी चढ़ाई जाएगी।
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देवी लोक महोत्सव का समापन आज
बीते तीन दिनों से चल रहे देवी महालोक (Salkanpur Devi Mahalok Bhoomipoojan) का समापन आज होगा। इसमें सुबह सीएम शिवराज देवी महालोक का शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर माता की कलश यात्रा निकालेगी। जिसके मंदिर में मां विजयासन को चुनरी चढ़ाई जाएगी।
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रंगोली और भजन प्रतियोगिता हुई
देवी लोक महोत्सव (Salkanpur Devi Mahalok Bhoomipoojan) के दौरान 29 मई को रंगोली प्रतियोगिता, कलश एवं पूजा की थाली सजाओ प्रतियोगिता और मिट्टी के दीये सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। तो वहीं 30 मई को विशाल लंगडी भजन प्रतियोगिता (पुरुष) का आयोजन किया गया। इसमें विजेताओं को पुरस्कार भी दिया गए। आज 31 मई को माताजी की चुनरी, शिला, कलश यात्रा निकाली जाएगी। इस अवसर पर मंदिर के स्वरुप पर आधारित वीडियो का प्रदर्शन भी होगा। कार्यक्रम में आतिशबाजी के पश्चात प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।
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बंजारों ने कराई थी मां सलकनपुर मंदिर की स्थापना
पौराणिक कथाओं के अनुसार करीब 300 साल से अधिक समय पहले बंजारों (Nomads) ने मां सलकनपुर मंदिर की स्थापना की थी। प्रचलित कथा के अनुसार करीब 300 साल पहले बंजारों की मनोकामना पूर्ण होने पर उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया था। कहते हैं पशु व्यापारी रहे बंजारे इस स्थान पर विश्राम और पशुओं के चारे के लिए इस स्थान पर रुके थे। एक बार उनके पशु अचानक अदृश्य हो गए। काफी खोजने के बाद भी बंजारों को अपने पशु नहीं मिले, ऐसे में एक बालिका वृद्ध बंजारे के सामने आई। बालिका के पूछने पर वृद्ध बंजारे ने सारी बात कही, तब बालिका ने कहा आप यहां देवी की पूजा अर्चना करें पशु मिल जाएंगे।
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जिस स्थान पर फेंका पत्थर वहीं बनाया मंदिर
बंजारे ने बालिका से पूछा कि यहां देवी ( Salkanpur Devi Lok Mahotsav) का स्थान कहां है, हमें नहीं मालूम, जिस पर बालिका ने पत्थर फेंककर स्थान बताया था। इसके बाद जिस स्थान पर पत्थर फेंका गया था वहां मां देवी मिली थीं। जैसे ही यहां बंजारों ने माता की पूजा की, उनके पशु मिल गए। इसके बाद यहां बंजारों की मनोकामना पूरी होने पर देवी मां की स्थापना कर मंदिर का निर्माण कराया।
श्रीमद भागवत कथा के अनुसार
श्रीमद भागवत कथा के अनुसार जब रक्तबीज नामक दैत्य से त्रस्त होकर देवता देवी मां की शरण में पहुंचे तो देवी मां ने देवताओं की परेशानी दूर करने के लिए विकराल रूप धारण कर लिया। इसी स्थान पर माता ने देत्य का संहार किया। देवताओं ने मां को आसन दिया, यही आसन मां विजयासन धाम के नाम से विख्यात हुआ।
पहाड़ों पर बैठी है मां विजयासन
सीहोर जिले में आने वाला सलकनपुर ( Salkanpur Devi Lok Mahotsav) विजयासन धाम जमीन से एक हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यहां पहले माता के दर्शन के लिए सीढ़ियों से जाना पड़ता था। जिसमें करीब 1400 से अधिक सीढ़ियां थीं, लेकिन अब यहां सड़क मार्ग और रोपवे के माध्यम से भी श्रद्धालु दर्शन करने के लिए जाते हैं। बता दें कि प्रसिद्ध देवीधाम सलकनपुर मंदिर (Salkanpur Devi Mahalok Bhoomipoojan) राजधानी भोपाल से 70 किलोमीटर दूर सीहोर में हैं। नवरात्रि के समय नौ दिनों में देशभर से यहां लगभग दस लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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