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संपत्ति घोषित नहीं की तो सैलरी खतरे में: इस राज्य के 13 लाख कर्मचारियों को सरकार का फरमान

Government Employees: संपत्ति घोषित नहीं की तो सैलरी खतरे में, इस राज्य के 13 लाख कर्मचारियों को सरकार का फरमान

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BP Shrivastava
Government Employees

Government Employees: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी किया है कि जिसके बाद यहां करीब 13 लाख सरकारी कर्मचारियों (government employees) की सैलरी पर खतरा मंडरा रहा है। अपनी प्रॉपर्टी का ब्योरा (Details) नहीं देने वाले इन कर्मचारियों को अगस्त महीने की सैलरी से हाथ धोना पड़ सकता है। संपत्ति घोषित (Property Declared) करने की समय सीमा 31 अगस्त है। यानी जो कर्मचारी इस तारीख तक प्रोपर्टी की डिटेल नहीं देंगे, उन पर यह आदेश लागू होगा। मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) पर अभी तक 26 फीसदी कर्मचारियों ने ही चल-अचल संपत्ति का ब्योरा भरा है। यूपी के मुख्य सचिव (chief Secretary) मनोज कुमार सिंह ने पिछले साल जारी आदेश का फॉलोअप करते हुए अब सैलरी में कटौती करने की बात भी कही है।

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पहले 31 दिसंबर 2023 तक मांगा था विविरण

उत्तर प्रदेश में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को अपने जमीन और जायदाद की जानकारी मानव संपदा पोर्टल पर देनी होती है। यूपी सरकार ने पिछले साल 2023 में 18 अगस्त को सरकारी कर्मचारियों के लिए ये आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956(Government Employees Conduct Rules, 1956) के नियम-24 के तहत राज्य के सभी सरकारी कर्मचारी 31 दिसंबर 2023 तक अनिवार्य रूप से अपनी चल-अचल संपत्ति ( Movable-Immovable Property) का विवरण दें। तब आदेश में ये भी था कि ऐसा नहीं करने पर कर्मचारियों का प्रोमोशन नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना था कि इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।

आदेश के बाद कई बार समयसीमा बढ़ाई

पहले आदेश के बाद सरकार ने कई बार समयसीमा बढ़ाई थी। पिछले अगस्त के बाद दिसंबर और फिर इस साल जून तक टाइम लिमिट बढ़ाई गई थी। 6 जून को राज्य सरकार ने समयसीमा 30 जून तक बढ़ाते हुए कहा कि संपत्ति की जानकारी नहीं देने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन और अपील) नियमावली-1999 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बाद एक बार फिर डेडलाइन 31 जुलाई कर दी गई।

यूपी में कुल 17 लाख सरकारी कर्मचारी

सरकार द्वारा कई बार डेडलाइन बढ़ाने के बावजूद कुल 26 प्रतिशत कर्मचारियों ने आदेश का पालन किया था। आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश में 17 लाख 88 हजार 429 सरकारी कर्मचारी हैं। इसमें से केवल 26 फीसदी ने ही चल-अचल संपत्ति का विवरण दिया है। इसका मतलब है कि कैलकुलेशन के हिसाब से 13 लाख से अधिक कर्मचारियों ने अभी तक डिटेल नहीं दी है।

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प्रमोशन के बाद सैलरी काटने का आदेश

अब सरकार ने 17 अगस्त के आदेश में कहा कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संपत्ति का विवरण देने वाले कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। सरकार का कहना है कि मानव संपदा पोर्टल पर शुरुआत में आई दिक्कतों के कारण समयसीमा बढ़ाई गई। मुख्य सचिव ने आदेश में कहा है कि 31 अगस्त तक जानकारी नहीं देने वालों की सैलरी काटी जाए। ये आदेश सभी विभागों और जिलाधिकारियों को भेजा गया है।

हालांकि, यूपी में ऐसा आदेश पहली बार नहीं आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने इस तरह का आदेश साल 2010 में भी दिया था। जब सूबे में मायावती की सरकार थी। लेकिन कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसका उल्लंघन किया, इसलिए अब योगी सरकार ने पोर्टल पर संपत्ति की जानकारी देने को अनिवार्य बना रही है।

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मामले पर सियासत भी शुरू

मुख्य सचिव के आदेश के बाद मामले पर सियासत भी शुरू हो गई है। भाजपा सरकार में मंत्री दानिश आजाद ने इसे मोदी और योगी सरकार की तरफ से पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मिटाने की दिशा में उठाया गया कदम करार दिया है। वहीं सपा ने योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, यूपी में सियासी पकड़ कमजोर होती देख राजनीति से प्रेरित होकर ऐसा कदम उठाया गया है। वरना यह आदेश तो 2017 में भी लाया जा सकता था।

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