Sahara Land Scam: सहारा जमीन घोटाले में EOW में FIR, भोपाल, जबलपुर, कटनी की 1000 करोड़ की जमीनें 98 करोड़ में बेची थी

Sahara Land Scam EOW action: मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर और कटनी में हुए सहारा जमीन घोटाले को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने शुक्रवार शाम को FIR दर्ज कर ली।

Sahara Land Scam

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Sahara Land Scam EOW action: मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर और कटनी में हुए सहारा जमीन घोटाले को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने शुक्रवार शाम को FIR दर्ज कर ली। जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने एक्शन लिया है।

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच में सामने आया है कि सहारा ग्रुप ने इन तीन शहरों में करीब 1000 करोड़ रुपये की जमीन को सिर्फ 98 करोड़ रुपये में बेच दिया था। इस बिक्री में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का भी पालन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, ग्रुप ने जमीन बेचकर मिले पैसों को सेबी-सहारा रिफंड खाते में भी जमा नहीं कराया। आरोप है कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। इस मामले की शिकायत आशुतोष मनु दीक्षित ने की थी।

[caption id="attachment_865358" align="alignnone" width="1083"]Sahara Land Scam सहारा इंडिया कंपनी। फाइल फोटो[/caption]

जमीन में 72.82 करोड़ का गबन

EOW की जांच में सामने आया है कि सहारा ग्रुप ने भोपाल, जबलपुर और कटनी में जमीनों को बेचकर कुल 72.82 करोड़ रुपये का गबन किया है। जानकारी के मुताबिक, भोपाल और सागर में जमीन बिक्री से मिली पूरी 62.52 करोड़ रुपये की रकम SEBI-Sahara खाते में जमा नहीं की गई। वहीं, जबलपुर, कटनी और ग्वालियर में अवैध कटौतियों (गलत तरीके से पैसे काट कर) के जरिए 10.29 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई।

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निवेशकों को नहीं मिला पैसा

सहारा की जमीन बेचने के बाद भी उन लोगों को पैसा वापस नहीं मिला, जिन्होंने सहारा में निवेश किया था। EOW ने इस मामले में इसी साल फरवरी में कंपनियों द्वारा सहारा ग्रुप की जमीन खरीदने को लेकर शुरुआती जांच (PE) शुरू की थी। अब इस मामले में खरीदार और बेचने वाले पक्ष के 9 लोगों से पूछताछ के बाद FIR दर्ज की गई है।

घोटाले कौन-कौन शामिल ?

EOW की जांच में यह भी पता चला है कि जबलपुर और कटनी की जमीन बिक्री के फैसलों में कॉर्पोरेट कंट्रोल मैनेजमेंट प्रमुख (CCM) सीमांतो रॉय सीधे तौर पर शामिल थे। भोपाल में जमीन सौदों के पैसों के लेन-देन और फैसलों में डीएमडब्ल्यू भोपाल के डीजीएम जेबी रॉय की सक्रिय भूमिका थी। वहीं, सागर के ज़मीन सौदे के फैसलों में सहारा के लैंड डिविजन के प्रमुख और डिप्टी मैनेजिंग वर्कर ओपी श्रीवास्तव भी शामिल पाए गए हैं।

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'शैल कंपनियों' में जमा की रकम

EOW के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए सहारा ग्रुप ने भोपाल में जमीन बेचकर मिले पैसे सेबी-सहारा रिफंड खाते में जमा नहीं कराए। सहारा ग्रुप ने राशि रकम सहारा इंडिया रियल एस्टेट लिमिटेड, सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन और कुछ निजी 'शैल कंपनियों' (फर्जी कंपनियों) के खातों में जमा कराई।

सहारा सिटी के लिए जमीनें खरीदी

- सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग कॉर्पोरेशन इन्वेस्टमेंट ग्रुप ने कई शहरों में निवेशकों से पैसे इकट्ठा करके 'सहारा सिटी' बनाने के लिए जमीनें खरीदी थीं।

- साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सहारा समूह को निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए कंपनी की प्रॉपर्टी बेचने की इजाजत दी थी।

- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जमीन के सौदे की कीमत ज्यादा से ज्यादा 90 प्रतिशत या उससे अधिक तक तय की गई थी।

- प्रॉपर्टी बेचने की यह अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि खरीदार सीधे मुंबई में बैंक ऑफ इंडिया के सेबी-सहारा रिफंड खाता नंबर 012210110003740 में पैसे जमा करेंगे।

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