MP High Court: अतिक्रमण नहीं हटाने पर हाईकोर्ट सख्त, सागर कलेक्टर को लगाई फटकार, जानें मामला

MP High Court: सागर में अतिक्रमण के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने कलेक्टर को फटकार लगाई है। अदालत ने सागर कलेक्टर को निर्देशित किया है कि वे एक सप्ताह में अतिक्रमण हटाएं और रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करें, नहीं को खुद कोर्ट में हाजिर हों।

MP High Court: अतिक्रमण नहीं हटाने पर हाईकोर्ट सख्त, सागर कलेक्टर को लगाई फटकार, जानें मामला
हाइलाइट्स
  • शाहपुर नगर पंचायत में बढ़ते अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त
  • सागर कलेक्टर को कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश
  • अदातल ने अतिक्रमण हटाने के लिए दिया 7 दिन का समय

MP High Court: सागर जिले की नगर पंचायत शाहपुर की जर्जर होती व्यवस्थाओं और लगातार बढ़ते अतिक्रमण के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अब सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने सागर कलेक्टर संदीप जीआर को निर्देशित किया है कि वे एक सप्ताह के भीतर शाहपुर के मुख्य मार्गों से अतिक्रमण हटाएं और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करें, अन्यथा व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर हों। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अगर प्रशासन जनता की मूलभूत जरूरतों और कोर्ट के निर्देशों की भी अनदेखी करेगा, तो उसे जवाबदेही के लिए तैयार रहना होगा।

अतिक्रमण हटाने के आदेश पर नहीं दिखाई गंभीरता

दरअसल, सागर जिले की शाहपुर नगर पंचायत में लगातार बढ़ते अतिक्रमण और प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता अधिवक्ता राजेंद्र सिंह लोधी ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया कि नगर पंचायत की मुख्य मार्ग अवैध दुकानों, पक्के निर्माण और ठेले-फेरी वालों से भरे हुए हैं, जिससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।

कोर्ट के आदेश की अनदेखी

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 5 फरवरी 2025 को याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता 15 दिन में सागर कलेक्टर को अभ्यावेदन दें और कलेक्टर को 60 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाकर अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह संकेत मिला कि कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

रसूखदारों को राहत, किसानों के खिलाफ कार्रवाई

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों में बताया गया कि प्रशासन द्वारा छोटे किसानों से जुर्माना वसूला गया, जबकि प्रभावशाली लोगों के पक्के अतिक्रमण को नजरअंदाज किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और निष्पक्षता से कोसों दूर है। साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि किस प्रकार गरीबों को टारगेट किया जा रहा है और अतिक्रमण करने वाले प्रभावशाली लोगों को छूट दी जा रही है।

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हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

शुक्रवार को मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सागर कलेक्टर द्वारा अदालत के स्पष्ट आदेशों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही अनुपालन रिपोर्ट भी कोर्ट के समक्ष नहीं प्रस्तुत की गई। मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने सरकार के वकीलों से सख्ती से पूछा कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि अगर अब एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो सागर कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। अपने कोर्ट ने आदेश देते हुए यह दिखा दिया कि कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जनता को मिला भरोसा, प्रशासन पर बना दबाव

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शाहपुर के नागरिकों में आशा की किरण जगी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब सड़कों से अतिक्रमण हटेगा, यातायात सुधरेगा और नगर की व्यवस्था पहले से बेहतर होगी। वहीं, जिला प्रशासन पर कोर्ट के आदेश का पालन करने का भारी दबाव बन गया है।

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