सागर: मजदूर पिता ने बेटियों के लिए खेत में बनाया था रनिंग ट्रैक, अब ‘एथलीट हंट’ में मौका देगी सरकार

real life three dangal girl story

भोपाल। आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ तो आपने देखी ही होगी। फिल्म पहलवान महावीर सिंह फोगाट और उनकी बेटी गीता और बीबीता फोगाट के जीवन पर बनी थी। फिल्म में आमिर खान (Aamir Khan) ने महावीर सिंह फोगाट का किरदार अदा किया था। इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। ठीक एक ऐसी ही कहानी अब एमपी के बीना से आई है। जहां एक किसान पिता ने अपनी तीन बेटियों को खेत में प्रैक्टिस करवाकर खिलाड़ी बना दिया। किसान ने बेटियों के लिए खेत में ही ट्रैक बनवाया था। अब खेल विभाग इस खबर पर संज्ञान लेते हुए इन बेटियों को ‘एथलीट हंट’ में मौका देने का आश्वासन दिया है। जहां ये लड़कियां अगर सफल होती हैं तो उन्हें एथलीट एकेडमी में मौका मिलेगा।

पिता चाहते हैं कि खेल अकादमी में प्रशिक्षण मिले

दरअसल, कोरोना की वजह से राज्य में सारी खेल सुविधाएं अभी बंद है। टैलेंट हंट को भी जुलाई से शुरू किया जा सकता है। हालांकि बीना तहसील के करोंद गांव निवासी विनोद रजक अपनी तीन बेटियों काजल, आस्था और पूजा के साथ हर दिन 15-20 किलोमीटर खेत और रेलवे ट्रैक पर दौड़ लगाते हैं। पिता के संघर्ष के बदौलत 3 लड़कियों में से दो ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन भी किया है। लेकिन एक बेहतर एथलीट के लिए जरूरी संसाधनों से मोहताज होने के कारण वो पिछड़ जाती हैं। ऐसे में विनोद चाहते हैं कि उनकी बेटियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाली खेल अकादमी में प्रशिक्षण मिले, ताकि वह अपने राज्य और देश का नाम रोशन कर सके।

पिता के सपने के कारण बेटी बनी एथलिट

तीनों लड़कियों के एथलिट बनने की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दरअसल, करोंद निवासी विनोद रजक को बचपन से ही खेलकुद में रूझान था। वे एक सफल एथलिट बनकर देश का नाम रोशन करना चाहते थे। लेकिन गरीबी और फिर परिवार की जिम्मेदारी के चलते वे अपना सपना पूरा नहीं कर सके। लेकिन अब वे अपनी तीन बेटियों के सहारे सपने को साकार करना चाहते हैं। हालांकि आज भी गरीबी उनके काम में बाधा बन रही है। विनोद रजक महज 1 एकड़ जमीन के मालिक हैं। परिवार के भरण-पोषण के लिए वे खेती के अलावा मजदूरी भी करते हैं। ताकि बेटियों को एथलीट बनने में कोई दिक्कत न हो।

पिता अब क्या चाहते हैं

गांव में मैदान ना होने की स्थिति में उन्होंने अपने खेत में ही रनिंग ट्रेक बना दिया। जहां सुबह करीब 3 घंटे अपनी तीनों बेटियों के साथ विनोद दौड़ की प्रैक्टिस करते हैं।इसके बाद परिवार के भरण-पोषण के लिए मजदूरी करने चले जाते हैं। शाम 5 बजे फिर से मजदूरी से लौटने के बाद अपने बेटियों के साथ विनोद रनिंग ट्रेक पर पहुंच जाते हैं। हालांकि अब विनोद चाहते हैं कि उनकी बेटियां किसी खेल अकादमी से प्रशिक्षण ले। ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानदंड पर होने वाली प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

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