संकट में MLA निर्मला सप्रे की विधायकी: कांग्रेस की याचिका पर हाईकोर्ट में सोमवार को होगी सनुवाई, सरकार ने की यह मांग

MLA Nirmala Sapre Case: मध्य प्रदेश के बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर संकट गहरा गया है। कांग्रेस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि सप्रे ने दल-बदल किया है।

संकट में MLA निर्मला सप्रे की विधायकी: कांग्रेस की याचिका पर हाईकोर्ट में सोमवार को होगी सनुवाई, सरकार ने की यह मांग

हाइलाइट्स

  • बीना विधायक निर्मला सप्रे केस की सुनवाई सोमवार को
  • कांग्रेस ने इंदौर हाईकोर्ट में दायर की याचिका
  • बीना विधायक सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग

MLA Nirmala Sapre Case: मध्य प्रदेश के बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे (Bina MLA Nirmala Sapre) की विधानसभा सदस्यता पर संकट गहरा गया है। कांग्रेस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बीजेपी में शामिल होने वाली विधायक सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। विधायकी अयोग्य घोषित करने के मामले में दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी। लेकिन अब मामले में हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट के एडवोकेट विभोर खंडेलवाल ने बताया कि शुक्रवार को समय बीत जाने के कारण केस में सुनवाई टल गई। इधर, इस मामले में सरकार की मांग है कि केस में सुनवाई इंदौर के स्थान पर जबलपुर में होना चाहिए।

निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग

सागर जिले के बीना से विधायक निर्मला सप्रे के मामले में कांग्रेस लगातार हमलावर है। कांग्रेस (Congress) पहले से ही निर्मला सप्रे की विधायकी शून्य कराने पर अड़ी है। बीना की सड़कों पर प्रदर्शन के साथ ही विधानसभा में भी उनकी शिकायत की जा चुकी है। लेकिन सप्रे ने अब तक विधायकी से इस्तीफा नहीं दिया है। कांग्रेस ने लगातार मांग उठा रही है कि विधायक सप्रे ने दल-बदल किया है, इसलिए उनकी विधानसभा सदस्यता को रद्द किया चाहिए। यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

किस पार्टी में सप्रे?... सदस्यता पर उठे सवाल

दरअसल, बीना विधायक निर्मला सप्रे एक दशक से कांग्रेस की ओर से राजनीति में सक्रिय रहीं थी और 2023 में बीजेपी के महेश राय को पराजित कर पहली बार विधायक बनी हैं। वह कांग्रेस के टिकट पर बीना सीट से विधायक चुनी गई हैं, लेकिन एमसी सियासत में उस समय मोड़ आया जब 5 मई 2024 को निर्मला सप्रे लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच साझा किया था, तब से वे बीजेपी के साथ हैं, लेकिन औपचारिक रूप से विधायकी से इस्तीफा नहीं दिया है। वह आज भी कांग्रेस से विधायक हैं।

कांग्रेस ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका

अब कांग्रेस ने फिर मामले में निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द कराने की मांग करते हुए हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका लगाई है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पुष्टि करते हुए कहा था कि कांग्रेस ने जुलाई में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र दिया था। लेकिन विधानसभा ने कागज गुमा दिए। मामले में 90 दिन बाद भी विधानसभा अध्यक्ष ने कोई फैसला नहीं लिया, ऐसे में कांग्रेस अब हाईकोर्ट पहुंची है।

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सप्रे ने किया है दल-बदल

कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे पर कांग्रेस के आरोप हैं कि बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद भी वह पार्टी से विधायक हैं। वह अब कांग्रेस से विधायक नहीं रह सकती है, सप्रे ने दल-बदल किया है, उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा नहीं दिया है। वहीं सप्रे स्पीकर को ये पत्र दे चुकी हैं कि बीजेपी ज्वाइन नहीं की लेकिन कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है। बीजेपी का कहना है कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता नहीं ली है।

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MP में 133 साल पुरानी जमीन पर रक्षा मंत्रालय का कब्जा: हाईकोर्ट ने कार्रवाई को बताया गलत, कहा- तुरंत लौटाया जाए कब्जा

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Mhow land Dispute: मध्य प्रदेश के महू में स्थित 133 साल पुरानी 1.8 एकड़ जमीन पर रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए जबरन कब्जे को लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने मंत्रालय की कार्रवाई को गलत बताते हुए कब्जा तुरंत हटाने का आदेश दिया है। यह जमीन 1892 में खरीदी गई थी और 1995 से विवादों में है। कब्जा किए जाने के मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

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