Mohan Bhagwat: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने किया 'परिक्रमा कृपा सार' का विमोचन, बोले- लॉजिक से नहीं, धर्म से चलती है दुनिया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने इंदौर में आयोजित 'नर्मदा परिक्रमा' पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कहा कि भारत की आस्था काल्पनिक नहीं, प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दुनिया धर्म से चलती है, तर्क से नहीं।

Mohan Bhagwat: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने किया 'परिक्रमा कृपा सार' का विमोचन, बोले- लॉजिक से नहीं, धर्म से चलती है दुनिया

हाइलाइट्स

  • संघ प्रमुख ने किया 'परिक्रमा कृपा सार' पुस्तक का विमोचन।
  • मोहन भागवत ने उठाया धर्म, आस्था और विज्ञान का मुद्दा।
  • नर्मदा खंड सेवा संस्थान के कार्यक्रम में सीएम मोहन हुए शामिल।

Indore RSS Chief Mohan Bhagwat Kripasar Book Launch: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को इंदौर में आयोजित एक विशेष समारोह में मंत्री प्रह्लाद पटेल द्वारा लिखित पुस्तक 'कृपासार' का विमोचन किया। यह पुस्तक नर्मदा परिक्रमा के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित है। इस मौके पर उन्होंने भारतीय संस्कृति, आस्था, विज्ञान और समाज की वर्तमान स्थिति को लेकर कई विचार साझा किए।

 प्रह्लाद पटेल की 'कृपासार' पुस्तक का विमोचन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत रविवार को इंदौर में आयोजित नर्मदा खंड सेवा संस्थान के कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल द्वारा लिखित पुस्तक ‘परिक्रमा कृपासार’ का विधिवत विमोचन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसे स्वयं डॉ. भागवत ने संपन्न किया। इस मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। यह पुस्तक प्रह्लाद पटेल की नर्मदा परिक्रमा यात्रा पर आधारित है, जिसमें उनके आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत अनुभवों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। इस कृति के माध्यम से उन्होंने नर्मदा नदी के महत्व और सनातन परंपरा से जुड़े भावों को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।

आज सभी के मन में अहम... इसलिए संघर्ष

RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने नर्मदा खंड सेवा संस्थान के कार्यक्रम में समाज में बढ़ रहे टकराव और व्यक्तिगत स्वार्थ की भावना को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज विश्वभर में संघर्ष का सबसे बड़ा कारण 'अहम' की भावना है। हर कोई सिर्फ अपने आगे बढ़ने की सोच में डूबा है और चाहता है कि कोई दूसरा उससे आगे न निकल पाए। इसी मानसिकता ने समाज में टकराव, असहिष्णुता और विभाजन को जन्म दिया है।

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि ‘कृपासार’ में नर्मदा परिक्रमा जैसे श्रद्धा से जुड़े विषय का वर्णन है, जिसे उन्होंने सहज स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा बहुत बड़ी श्रद्धा का विषय है। हमारा देश श्रद्धा का देश है। यहां कर्मवीर भी हैं और तर्कवीर भी हैं। भारत न सिर्फ तर्क और शास्त्रार्थ में सक्षम है, बल्कि यहां श्रद्धा और विश्वास से ही जीवन चलता है, आज जड़वादी सोच वाले भी इसे स्वीकारने लगे हैं।

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भारत दुनिया से पीछे नहीं है....

उन्होंने आगे कहा कि कहा कि भारत किसी भी देश से पीछे नहीं है। हमारे पास तर्क भी है और श्रद्धा भी। उन्होंने कहा कि दुनिया श्रद्धा और विश्वास के आधार पर चलती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत में आस्था कोई काल्पनिक भावना नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभूति पर आधारित है। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी प्रमाणित की जा सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि जो लोग खुद को वैज्ञानिक कहते हैं, उनके पास भी सबकुछ का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं होता।

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दुनिया धर्म से चलती है, लॉजिक से नहीं

संघ प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “दुनिया धर्म से चलती है, लॉजिक से नहीं।” उन्होंने कहा कि धर्म किसी को पीड़ा नहीं देता, बल्कि सबको जोड़ने का कार्य करता है। आज समाज में विकृति आ गई है, रिश्ते टूट रहे हैं और अपनापन खत्म हो रहा है। डॉ. भागवत ने कहा कि वर्तमान समय में माता-पिता को घर से निकाला जा रहा है, यह सामाजिक पतन का संकेत है। उन्होंने धर्म को इस समस्या का समाधान बताया और कहा कि धर्म से ही समाज को जोड़े रखा जा सकता है।

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मंत्री पटेल बोले- नर्मदा को बेचना नहीं चाहता

नर्मदा परिक्रमा के अनुभव साझा करते हुए पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि उन्होंने पहले इस पुस्तक को छपवाने से मना कर दिया था क्योंकि वह “नर्मदा को बेचना” नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नर्मदा परिक्रमा वासियों और गौसेवा के लिए समर्पित है।

पटेल ने कहा कि “नर्मदा हमारी माता है, नदियां हमारी विरासत हैं। यह पुस्तक विमोचन एक यज्ञ है, इसकी एक-एक पाई परिक्रमा वासियों और गौसेवा में लगेगी।”

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राजनीति में भी करनी पड़ती है परिक्रमा

इस दौरान स्वामी ईश्वरानंद ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा और प्रकृति से जुड़ने की प्रक्रिया है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “राजनीति में भी ऊपर उठने के लिए परिक्रमा करनी पड़ती है।”

कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद: इस भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रीगण, संत समाज और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, मंत्री विश्वास सारंग, राकेश शुक्ला, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, चैतन्य काश्यप, तुलसीराम सिलावट, मेयर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलू शुक्ला, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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