दोषी कौन: एक्टिवा से गड्‌ढे में गिरी पत्नि तो पति ने खुद पर दर्ज कराया केस, पर गड्ढों के लिए जिम्मेदार अफसरों का क्या?

Road Accidents to Potholes: इंदौर में एबी रोड स्थित BRTS में गड्‌ढे की वजह से स्कूटर पर पति के साथ जा रही पत्नी हादसे का शिकार हो गई।

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Road Accidents to Potholes: एमपी के इंदौर में एक पति ने खुद पर केस दर्ज करवाया है। वजह है कि एक्टिवा चलाने के दौरान पीछे बैठी पत्नी गड्ढे के कारण सड़क पर गिर गई। इस वाक्ये ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं।

पत्नि को आई चोट के लिए पति ने खुद को जिम्मेदार माना और लापरवाही से स्कूटर चलाने के लिए स्वयं पर एफआईआर दर्ज करवा ली, पर बंद एसी कमरों में बैठे उन अफसरों का क्या जो गड्ढा न भरने के लिए जिम्मेदार है। सवाल ये है कि क्या वे भी अपनी कोई नैतिक जिम्मेदारी मानेंगे या सिर्फ पेंचवर्क की खानापूर्ती कर इतश्री कर लेंगे।

पति ही फरियादी और आरोपी भी

घटना 14 सितंबर की है। इंदौर में एबी रोड स्थित BRTS में गड्‌ढे की वजह से स्कूटर पर पति के साथ जा रही पत्नी हादसे का शिकार हो गई। घटना के समय महिला की गोद में दो साल का बच्चा भी था। पत्नी को सिर और पैर में चोट लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया।

सूचना पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची। पत्नी बयान देने की स्थिति में नहीं थी। उसकी जगह बाइक चला रहे पति ने बयान दे दिए। घटना के पीछे खुद की लापरवाही बताई। इस बयान के आधार पर पुलिस ने पति पर केस दर्ज कर लिया। मामले में पति फरियादी और आरोपी दोनो है।

पति ने पुलिस को ये दिया बयान

पति ने एफआईआर में कहा कि '14 सितंबर को रात करीब 8 बजे मैं अपने छोटे भाई कार्तिक गौड की एक्टिवा MP 09 DH 8539 से पत्नी शानू गौड और दो 2 साल के बेटे को गाड़ी के पीछे बैठाकर विजय नगर से होते हुए नौलखा डॉक्टर को दिखने के लिए जा रहा था। जैसे ही मैं एलआईजी चौराहे पर पहुंचा तो ट्रैफिक जाम होने के कारण यहां पर लगे सुरक्षाकर्मी के द्वारा बीआरटीएस के अंदर से ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया। मैं जल्दी के कारण अपनी गाड़ी तेजी और लापरवाही पूर्वक चलाने लगा।

जैसे ही ब्लैक पल्प के सामने पहुंचा तो बीआरटीएस में बने गड्ढे में मेरी गाड़ी जाने से गाड़ी का बैलेंस बिगड़ गया। जिसके कारण मेरी गाड़ी उछल गई और गाड़ी के पीछे बैठी पत्नी दो साल के बच्चे के साथ रोड पर गिर गई। पत्नी को सिर और दाहिने पैर की एड़ी में चोट लगी और खून निकलने लगा। घटना लोकचंद कुशवाह और आसपास वालों ने देखी। पत्नी को ऑटो रिक्शा में बैठाकर राहगीरों की मदद से सीएचएल केयर अस्पताल लेकर गया। जहां उसे आईसीयू में भर्ती किया गया।'

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पति की ईमानदारी से अब ये हो सकती है मुश्किल

बीमा क्लेम:हादसे वाली जगह प्रतिबंधित एरिया है। यहां सिर्फ सिटी बस, एंबुलेंस, पुलिस और आर्मी वाहन समेत वीआईपी मूवमेंट को ही इजाजत है।

हालांकि ट्रैफिक डायवर्ट करने के कारण पति ने इस रास्ते का उपयोग किया, हालांकि वो इसे साबित नहीं कर पाया तो प्रतिबंधित इलाके में हादसा होने से बीमा कंपनी क्लेम में न नुकुर कर सकती है। पति ने एफआईआर में खुद की लापरवाही की बात स्वीकर की है यानी थर्ड पार्टी बीमा क्लेम तो वैसे भी नहीं बनेगा।

सजा का खतरा:पति ने एफआईआर में उन गवाहों के नाम भी बता दिए जो इस बात की पुष्टी कर सकते हैं कि गाड़ी चलाते समय लापरवाही बरती गई।

यही कारण है कि पति के खिलाफ धारा 281, 125ए में केस दर्ज किया है। तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाने पर 6 महीने की सजा का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में आरोपी और फरियादी दोनो ही एक है, ऐसे में केस पर खात्मा लगाया जाएगा, इसकी सबसे ज्यादा संभावना है। घायल पत्नि भी इसका विरोध नहीं करेगी।

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गड्ढों के लिए जिम्मेदार अफसरों का क्या

एमआईजी टीआई मनीष लोधा के मुताबिक वे गड्ढा भरने के लिए नगर निगम और पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखेंगे। गड्ढों के लिए जिम्मेदार अफसरों पर विभाग ने खुद कोई बड़ी कार्रवाई की हो, अमूमन ऐसे उदाहरण देखने को नहीं मिलते हैं।

हालांकि इसके लिए हादसे का शिकार हुआ परिवार का कोई भी सदस्य या कोई आम व्यक्ति भी नगर निगम या पीडब्ल्यूडी के खिलाफ कोर्ट में रिट पिटीशन लगा सकता है। पुलिस चाहे तो खुद भी संज्ञान लेकर नगर निगम को आरोपी बना सकती है।

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