Road Accident: अपने जिगर के टुकड़े का स्कूल भेजते समय रखे खास ख्याल, नहीं तो डराने वाले हैं MBRDI के आंकड़े

Road Accident: अपने जिगर के टुकड़े का स्कूल भेजते समय रखे खास ख्याल, नहीं तो डराने वाले हैं MBRDI के आंकड़े Road Accident: Take special care while sending your liver pieces to school, otherwise the MBRDI figures are intimidating

Road Accident: अपने जिगर के टुकड़े का स्कूल भेजते समय रखे खास ख्याल, नहीं तो डराने वाले हैं MBRDI के आंकड़े

नई दिल्ली। करीब 30 प्रतिशत बच्चे स्कूल जाते समय सड़क दुर्घटना के शिकार हुए, जबकि उनमें से छह प्रतिशत ऐसी दुर्घटनाओं की चपेट में आए। एक सर्वेक्षण में यह कहा गया है। सेवलाइफ फाउंडेशन ने मर्सिडीज-बेंज रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंडिया (एमबीआरडीआई) के सहयोग से सर्वेक्षण किया है।

इसका उद्देश्य स्कूल जाने के दौरान बच्चों की सड़क सुरक्षा में सुधार करने के उपायों को लेकर विभिन्न आयु-वर्ग और भौगोलिक क्षेत्रों से जानकारी प्राप्त करनी थी। कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद किए गए सर्वेक्षण में भारत के 14 शहरों में 5,711 बच्चे (कक्षा 6-12 के) और 6,134 माता-पिता (कक्षा 1-12 के बच्चों के साथ) सहित 11,845 लोगों की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया है।

सर्वेक्षण में शामिल आधे से अधिक अभिभावकों ने कहा कि स्कूल अधिकारियों ने उन्हें बताई गई सुरक्षा चिंताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की। इन मुद्दों में स्कूली वाहनों में भीड़, स्कूल के पास भीड़भाड़ और स्कूल क्षेत्र में चालकों द्वारा तेज गति से वाहन चलाना शामिल हैं।

सर्वेक्षण किए गए शहरों में अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, दिल्ली, जयपुर, जमशेदपुर, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, पटना, पुणे और विजयवाड़ा शामिल हैं। लगभग 47 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया कि उनके वाहनों में सीट बेल्ट नहीं थे।

बेंगलुरू (78 फीसदी) और लखनऊ (66 फीसदी) में सीट बेल्ट युक्त स्कूली वाहनों का अनुपात अधिक था। विजयवाड़ा में केवल 13 प्रतिशत प्रतिभागियों और कोलकाता में 28 प्रतिशत ने बताया कि उनके वाहन में सीट बेल्ट थे। सर्वेक्षण ने स्कूल क्षेत्रों के पास सुरक्षा मानकों में कमियों को भी उजागर किया। देश में 18 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 50 करोड़ से अधिक है।

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