रीवा लोकसभा सीट: आसान नहीं है BJP की राह, नीलम दे रहीं जनार्दन को कड़ी टक्कर, जानें जातीय समीकरण

Rewa Lok Sabha Seat: रीवा लोकसभा सीट से इस बार बीजेपी से जनार्दन मिश्रा और कांग्रेस से नीलम मिश्रा आमने-सामने है।

रीवा लोकसभा सीट: आसान नहीं है BJP की राह, नीलम दे रहीं जनार्दन को कड़ी टक्कर, जानें जातीय समीकरण

हाइलाइट्स

  • रीवा से बीजेपी ने जनार्दन मिश्रा को बनाया प्रतियोगी

  • कांग्रेस ने नीलमणि मिश्रा को खड़ा कर दिया

  • 10 साल से इस सीट पर बीजेपी का कब्ज़ा

Rewa Lok Sabha Seat: लोकसभा चुनाव के दौरान मध्यप्रदेश में विंध्य की रीवा लोकसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प दिखाई दे रहा है। वो इसलिए क्योंकि राजनीतिक जानकार बताते हैं कि कुछ समय पहले तक इन दोनों सीटों पर एकतरफा चुनाव लग रहा था, लेकिन अब यहां कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।

   इस बार 50-50 का मुकाबला

रीवा लोकसभा सीट को लेकर ऐसा भी कहा जा रहा है कि यहां 50-50 का मुकाबला है, आखिरी समय में यहां से कोई भी बाजी मार सकता है। चलिए आपको बताते हैं विंध्य की रीवा सीट का सियासी समीकरण...

   26 अप्रैल को 7 सीटों पर होगा मतदान

मध्य प्रदेश में पहले चरण की 6 सीटों पर मतदान के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दलों का चुनाव अभियान अब दूसरे फेज में शुरू हो गया है।
दूसरे चरण में 26 अप्रैल को 7 सीटों पर मतदान होना है। जिनमें खजुराहो, दमोह, टीकमगढ़, होशंगाबाद, रीवा और सतना शामिल है।

Rewa Lok Sabha Seat

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार विंध्य में बीजेपी की हालत पतली नजर आ रही है। यही वजह है कि बीजेपी रीवा सीट पर अपनी कमर कसकर पूरा फोकस कर रही है।

   क्या कहता है रीवा लोकसभा सीट का चुनावी गणित?

रीवा लोकसभा सीट से कांग्रेस ने विधायक अभय मिश्रा की पत्नी और पूर्व विधायक नीलम मिश्रा को प्रत्याशी बनाया है। जिनका मुकाबला बीजेपी के जर्नादन मिश्रा से होने वाला है।

हालांकि इस सीट पर कांग्रेस के टिकट डिसाइड नहीं होने तक बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आ रहा था, लेकिन जैसे ही कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारा तभी से यहां के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
अब यहां कांग्रेस की नीलम मिश्रा बीजेपी के जनार्दन मिश्रा को कड़ी टक्कर देती नजर आ रही हैं।

   चलिए जानते हैं रीवा लोकसभा सीट का इतिहास

रीवा लोकसभा के चुनावी इतिहास की बात करें तो यहां 1967 के बाद से कांग्रेस काफी कमजोर हैं। यानी कि 1962 के चुनाव के बाद यहां से कांग्रेस को कभी भी लगातार 2 जीत नहीं मिली। बता दें कि कांग्रेस पिछले 40 साल में यहां से सिर्फ एक बार ही जीत हासिल कर पाई है, वहीं बसपा ने यहां से 3 चुनाव जीते हैं।

कुल मतदाता -27,82,375
पुरुष -14,49,516
महिला -13,32,834
थर्ड जेंडर -25

   8 विधानसभा सीटों में से 7 पर बीजेपी का कब्जा

आपको बता दें कि रीवा लोकसभा सीट के अंतर्गत 8 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें रीवा, गुढ़, सेमरिया, सिरमौर, मनगवां, त्योंथर, मऊगंज और देवतालाब समेत 8 विधानसभा हैं। जिनमें से 7 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, तो वहीं एक सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के पति अभय मिश्रा विधायक हैं।
माध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल भी इसी क्षेत्र से आते हैं। इसके बावजूद यहां पर बीजेपी की राह आसान नहीं दिख रही है।

राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, सर्वे में इस सीट पर बीजेपी को मन मुताबिक फीडबैक नहीं मिला है। इसी वजह से बीजेपी अपनी पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है।

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   बड़ा सवाल, क्या लगातार तीसरी बार चुनाव जीत पाएंगे जर्नादन?

मोदी लहर के दौरान साल 2014 में जनार्दन मिश्रा पहली बार रीवा लोकसभा से सांसद निर्वाचित हुए थे।

बीजेपी ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें दोबारा चुनाव मैदान में उतारा था। जहां जनार्दन ने कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ तिवारी राज को हराकर कर दोबारा चुनाव जीता था। इस बार बीजेपी ने तीसरी बार मिश्रा को मैदान में उतारा है। अब बड़ा सवाल ये है कि तीसरी बार जनार्दन मिश्रा चुनाव जीत पाएंगे। क्योंकि इस बार मिश्रा की मुसीबत कम नहीं है।

   कैसा रहा था 2019 का लोकसभा चुनाव?

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी जनार्दन मिश्रा ने कांग्रेस के सिद्धार्थ तिवारी को हरा दिया था। सिद्धार्थ ने विधानसभा चुनाव के टाइम कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। सिद्धार्थ अभी त्योंथर सीट से विधायक हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में मिश्रा ने 583769 यानी 57.61 फीसदी वोटों से जीत हासिल की थी। जबकि, उनके मुकाबले सिद्धार्थ तिवारी को महज 270961 यानी 26.74 फीसदी ही वोट मिले थे।

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समीकरण

रीवा लोकसभा की 8 में से कांग्रेस ने केवल सेमरिया विधानसभा सीट जीती है। नीलम मिश्रा के पति अभय यहां से विधायक हैं। उनकी सवर्ण वोटर्स पर अच्छी पकड़ है। अब इस बार के लोक सभा चुनाव में देखते हैं किसका पलड़ा भारी नजर आता है।

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