MP News: HC से वोकेशनल ट्रेनर्स को राहत, कोर्ट ने कहा- स्कूलों में पहले से काम कर रहे ट्रेनर्स को हटाकर नई नियुक्ति करना अनुचित

MP News: HC से वोकेशनल ट्रेनर्स को राहत, कोर्ट ने कहा- स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनर्स की जगह नई नियुक्ति करना अनुचित, ये दिए निर्देश

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MP News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने स्कूलों में कार्यरत वोकेशनल ट्रेनर्स को लेकर बड़ी व्यवस्था दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में पहले से कार्यरत वोकेशनल ट्रेनर्स को हटाकर उनकी जगह नई नियुक्ति करना अनुचित है।

जस्टिस संजय यादव की एकलपीठ ने कहा कि सरकार चाहे तो उच्च योग्यता वाले नए ट्रेनर्स का चयन नए स्कूलों के लिए कर सकती है, लेकिन कार्यरत ट्रेनर्स की योग्यता और अनुभव को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। इस मत के साथ हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिए कि वे अपने कृत्य पर दोबारा विचार करें और नई नियुक्ति के लिए वैकल्पिक उपायों को अपनाएं। कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश भर के स्कूलों में नियुक्त हजारों वोकेशनल ट्रेनर्स को बड़ी राहत मिली (MP News ) है।

जुलाई में कोर्ट ने वोकेशनल ट्रेनर्स की नई नियुक्ति पर लगाई थी रोक

कोर्ट ने इसके पहले जुलाई माह में अंतरिम आदेश के तहत वोकेशनल ट्रेनर्स की नई नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सागर निवासी गोविंद प्रसाद सेन सहित प्रदेश भर के सैकड़ों संविदा वोकेशनल ट्रेनर्स की ओर से याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर, समरेश कटारे ने बताया कि पिछले माह 2 जुलाई को व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया है। दलील दी गई कि पूर्व से इस पद पर कार्य कर रहे प्रशिक्षकों को हटाकर नए सिरे से वोकेशनल ट्रेनर्स की नियुक्ति की जा रही है, जोकि अनुचित (MP News ) है।

नई नियुक्ति के विज्ञापन ये दी गईं शर्तें

याचिकाकर्ता पिछले 10 वर्षों से भी अधिक समय से काम कर रहे हैं। इस विज्ञापन के चलते कार्यरत ट्रेनर्स को भी नए सिरे से पूरी प्रक्रिया यानी परीक्षा और साक्षात्कार से गुजरना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में भी इस तरह की याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिसमें यह कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाताओं के माध्यम से नई चयन प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। दलील दी गई कि याचिकाकर्ताओं का चयन परीक्षा देने के बाद ही हुआ है और अब तो वे अनुभवी भी हो गए हैं। यह तर्क भी दिया गया कि नए विज्ञापन में वही योग्यताएं मांगी गई हैं, जो याचिकाकर्ताओं के पास पहले से हैं। नए आवेदन आमंत्रित करके याचिकाकर्ताओं को नए कैंडिडेट्स से रिप्लेस (replaced) नहीं किया जा सकता (MP News ) है।

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