RBI गवर्नर शक्तिकांत दास अपोलो में भर्ती: एसिडिटी की हुई थी समस्‍या, 2-3 घंटे में होंगे डिस्चार्ज, जानें तबीयत का हाल

RBI Governor Shaktikanta Das Health Update: RBI गवर्नर शक्तिकांत दास को आज 26 नवंबर को चेन्नसई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। RBI के प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें एसिडिटी की समस्या हुई थी।

RBI Governor Shaktikanta Das Health Update Acidity

RBI Governor Health Update

RBI Governor Health Update: RBI गवर्नर शक्तिकांत दास को आज 26 नवंबर को चेन्‍नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। RBI के प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें एसिडिटी की समस्या हुई थी, जिसके कारण उन्हें निगरानी के लिए चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया।

वर्तमान में उनकी हालत स्थिर है और अगले 2-3 घंटों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। प्रवक्ता के अनुसार उनकी सेहत को लेकर कोई चिंता की बात नहीं है।

शक्तिकांत है टॉप सेंट्रल बैंकर

शक्तिकांत दास को लगातार दूसरे साल दुनिया के टॉप सेंट्रल बैंकर के रूप में चुना गया है। पिछले महीने उन्हें सेंट्रल बैंक रिपोर्ट कार्ड 2024 में एक बार फिर A+ ग्रेड मिला।

यह अवॉर्ड उन्हें अमेरिका के वाशिंगटन D.C. में ग्लोबल फाइनेंस द्वारा प्रदान किया गया। इस सम्मान से शक्तिकांत दास की वैश्विक वित्तीय क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट भूमिका और योगदान को सराहा गया है।

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1980 बैच के IAS हैं दास

शक्तिकांत दास 1980 बैच के IAS अधिकारी हैं और दिल्ली के स्टीफन कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वे 2017 मई तक आर्थिक मामलों के सचिव (Economic Affairs Secretary) के रूप में कार्यरत थे।

12 दिसंबर 2018 को, उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 25वें गवर्नर के रूप में पदभार संभाला। उन्हें उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद RBI गवर्नर बनाया गया था। दास का कार्यकाल भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण फैसलों और नीतियों के लिए जाना जाता है।

नोटबंदी के समय संभाला था मोर्चा

आपको बता दें कि नवंबर 2016 में जब भारत में नोटबंदी का ऐलान हुआ था, तब भी शक्तिकांत दास मुख्य मोर्चे पर थे और इस प्रक्रिया में उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

इसके अलावा दास ने 15वें फाइनेंस कमीशन में सदस्य के रूप में भी कार्य किया था। उन्होंने भारत की ओर से ब्रिक्स, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) और सार्क जैसी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी प्रतिनिधित्व किया है, जहां उन्होंने भारत के आर्थिक हितों का समर्थन किया और वैश्विक वित्तीय नीतियों पर प्रभाव डाला।

उनके अनुभव और नेतृत्व ने उन्हें कई महत्वपूर्ण आर्थिक और वित्तीय निर्णयों में प्रमुख भूमिका निभाने का अवसर दिया है।

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