MP Ratlam Satrunda Mata Mandir: भीम की डेढ़ ​मुट्ठी मिट्टी से बना है ये मंदिर, मां कंवलका देती हैं तीन रूपों में दर्शन

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Ratlam satrunda mata mandir

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रिपोर्ट: रतलाम से दिलजीत सिंह मान

MP Ratlam Satrunda Mata Mandir: रतलाम जिले में आस्था और रहस्य से जुड़ा सातरुंडा माता मंदिर नवरात्रि में श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बन जाता है। रतलाम मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर नयागांव–लेबड़ फोरलेन से 3 किलोमीटर दूर बिरमावल ग्राम पंचायत की पहाड़ी पर ये मंदिर स्थित है।

अज्ञातवास के दौरान बना है मंदिर

ऐसा कहा जाता है कि जब पांडव अज्ञातवास में थे, तब भीम यहां पहुंचे। उनकी गाय खो गई थी। गाय की तलाश में उन्होंने अपनी विशाल मुठ्ठियों से डेढ़ मुठ्ठी मिट्टी से इस पहाड़ी का निर्माण कर दिया और इसी ऊंचाई से उन्होंने अपनी गाय को खोजा। तभी से यह पहाड़ी सातरुंडा माता मंदिर का आधार बन गई।

तीन रूपों में मैया देती हैं दर्शन

इस पहाड़ी पर विराजित मां कंवलका तीन रूपों में भक्तों को दर्शन देती हैं। सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था। मान्यता है कि मां के दरबार में जो भी श्रद्धालु बच्चों की मनोकामना लेकर आते हैं, उनकी कामना पूर्ण होती है।

यहां की एक अनोखी परंपरा भी है

आज भी मां को मदिरा का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर माता को मदिरा अर्पित करते हैं और बलि भी देते हैं। यही वजह है कि नवरात्र के दौरान यहां हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगता है।

मंदिर में मां कंवलका की प्रतिमा

मंदिर में मां कंवलका की प्रतिमा के साथ कालिका माता, कालभैरव और भगवान भोलेनाथ भी विराजित हैं। 300 से अधिक सीढ़ियां चढ़कर भक्त मंदिर तक पहुंचते हैं। नवरात्र में यहां भव्य मेला भरता है, जिसमें रतलाम सहित उज्जैन, इंदौर, धार, झाबुआ और देवास मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि राजस्थान के बांसवाड़ा उदयपुर चित्तौड़गढ़ निंबाहेड़ा से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं।

संतान प्राप्ति के लिए बनाते हैं उल्टा स्वास्तिक

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मंदिर के पुजारी रागू गिरी गोस्वामी ने बताया कि भक्त मंदिर के पीछे नि:संतान लोग उल्टा सातिया बनाते हैं। जब मन्नत पूरी हो जाती है तो उस सातियां को सीधा कर दिया जाता है। मंदिर में माता रानी को मदिरा को भोग लगता है।

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