रतलाम में रिश्वतखोर महिला पंचायत सचिव को सजा: अब चार साल कटेंगे जेल में, 5 साल पहले नामांतरण के लिए ली थी घूस

Madhya Pradesh Ratlam Panchayat Secretary Corruption Case: मकान के पट्‌टे के नामांतरण को लेकर मांगी गई रिश्वत के मामले में रतलाम कोर्ट ने जिले की ग्राम पंचायत मचुन की सचिव शानू पुरोहित निवासी पिपलौदा को दोषी माना

Ratlam Corruption Case

Ratlam Corruption Case: मकान के पट्‌टे के नामांतरण को लेकर मांगी गई रिश्वत मामले में पंचायत सचिव महिला को पांच साल बाद 4 साल जेल की सजा सुनाई गई है। साथ ही दो हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। मामला रतलाम की ग्राम पंचायत मचुन की सचिव शानू पुरोहित से जुड़ा है। इस मामले में फैसला विशेष कोर्ट विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रतलाम आदित्य रावत की कोर्ट ने सुनाया है।

मकान के पट्टे का नामांतरण करने के लिए ली थी रिश्वत

जिला अभियोजन अधिकारी जेपी घाटिया ने बताया कि 8 फरवरी 2019 को गोपाल पिता नंदराम पाटीदार निवासी ग्राम मचुन ने लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में शिकायत की थी। गोपाल ने मांगीलाल पाटीदार से 2 लाख 50 हजार रुपए में मकान खरीदा था। उक्त मकान के पट्टे का नामांतरण करने के लिए ग्राम पंचायत मचुन में आवेदन दिया। ग्राम पंचायत मचुन की सचिव शानू पुरोहित द्वारा जमीन के पट्टे का नामातंरण करने के एवज में 10 हजार रुपए मांगे गए। गोपाल ने 9 हजार रुपए दे दिए। एक हजार बाद में देने की कह दिया था। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस में शिकायत कर दी।

एक हजार रुपए घूस लेते पकड़ी गई थी पंचायत सचिव

लोकायुक्त पुलिस ने प्लानिंग के तहत 14 फरवरी 2019 को आवेदक गोपाल पाटीदार को ग्राम पंचायत मचुन की सचिव शानू पुरोहित को एक हजार रुपए दिए। इसी दौरान लोकायुक्त टीम ने सचिव को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। सचिव ने रिश्वत के रुपए लेकर अपने पर्स में रख लिए, इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने जो नोट फरियादी गोपाल को दिए थे उन नोट के नंबर से मिलान किया। सही पाए जाने पर सचिव के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

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कोर्ट से डेढ़ साल में फैसला

आरोपी पंचायत सचिव शानू पुरोहित के खिलाफ विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन द्वारा अभियोग पत्र विशेष न्यायालय रतलाम में 28 जून 2023 को प्रस्तुत किया। विशेष न्यायालय रतलाम ने सचिव शानू पुरोहित (25) पिता हरिओम पुरोहित निवासी भैंसाडाबर (पिपलौदा) को दोषी मानते हुए सोमवार, 30 दिसंबर 2024 को फैसला सुनाया।केस में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) कृष्ण कांत चौहान ने की।

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