रतलाम: होली से एक दिन पहले लगती है भूतों की हाजरी, सभी धर्मों के लोग पहुंचते है हुसैन टेकरी

रतलाम: होली से एक दिन पहले लगती है भूतों की हाजरी, सभी धर्मों के लोग पहुंचते है हुसैन टेकरी

Hussain Tekri

रतलाम। मप्र के जावरा में एक अनोखी परंपरा है। कहा जाता है कि यहां रूहानी ताकतें भूतों को सजा सुनाती है। भूत-प्रेत की बाधा से पीड़ित लोग जावरा के हुसैन टेकरी आकर गंदे पानी के नाले से नहाते हैं और फिर उसका कीचड़ लपेटकर कब्र में लेट जाते हैं। यहां सभी धर्मों के लोग पहुंचते हैं। कहा जाता है कि यहां रोजाना भूत-प्रेत की हाजरी लगती है और उन्हें सजा सुनाई जाती है।

लोग देखने पहुंचते हैं चमत्कारी रोशनी

खासकर होली दहन की रात यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु जटते हैं। मान्यता है कि होलिका दहन के दिन यहां एक चमत्कारी रोशनी दिखती है जिसे देखने से बुरी ताकतों से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है। लोग यहां रोजा-ए-टॉप शरीफ से बामनखेड़ी की तरफ जाने वाले खड़क के किनारे खेतों में रोशनी देखने के लिए जुटते हैं।

लोगों का बदल जाता है व्यवहार

कहा जाता है कि भूत-प्रेत से पीड़ित कोई इंसान जैसे ही रोजे के बाहर बनी जाली के पास आता है, वैसे ही उसका व्यवहार बदल जाता है। किसी की कंपकंपी छूटने लगती है तो कोई अचानक से चीखने लगता है। इस दौरान लोग नाले में नहाते हैं और कीचड़ लपेटकर कब्र में लेट जाते हैं।

हुसैन टेकरी का क्या है इतिहास

रतलाम जिला मुख्यालय से जावरा 33 किलोमीटर है। वहीं हुसैन टेकरी के इतिहास को देखें तो नवाब मोहम्मद इस्माईल अली खां की रियासत में एक बार दशहरा और मोहर्म एक दिन पड़ गया। ऐसे में जुलूस निकालने के लिए दोनों समुदाय में झगड़ा होने लगा, तब नवाब ने तय किया कि पहले दशहरे के जुलूस में लोग शामिल होंगे उसके बाद मोहर्रम का जुलूस निकाला जाएगा। ऐसे में जावरा में मोहर्रम के जुलूस को आधा-अधूरा ही निकाला गया। मोहर्रम के अगले दिन एक हीरानामक एक औरत ने देखा कि हुसैन टेकरी की जगह कई रूहानी शक्तियां वुजू कर मातम मना रहे हैं।

यहां हर गुरूवार को मेला लगता है

ये बात नवाब को बताई गई, जिसके बाद ताजियों को फिर से बनवाया गया और पूरी शानो-शौकत से जूलूस को निकाला गया। जुलूस जैसे ही हुसैन टेकरी पहुंचा लगों को रूहानी सुकून देने वाली खुश्बू का अहसास हुआ। इसके बाद नवाब ने जितनी जगह से खुशबू आ रही थी, उन जगहों को सुरक्षित कर दिया। जैसे ही ये बात लोगों तक फैली वे हुसैन टेकरी पहुंचने लगे। यहां हर गुरूवार को मेला लगने लगा। खासकर मोहर्म के चालीसवें दिन और होलिका दहन के दिन यहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचने लगे।

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