Ayodhya Ram Mandir: 500 साल बाद रामनवमी पर सूर्य तिलक से होगा रामलला का अभिषेक, तैयारी में जुटे वैज्ञानिक

Ayodhya Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या के राम मंदिर में 500 साल बाद पहली रामनवमी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।

Ayodhya Ram Mandir: 500 साल बाद रामनवमी पर सूर्य तिलक से होगा रामलला का अभिषेक, तैयारी में जुटे वैज्ञानिक

हाइलाइट्स

  • रामलला के ललाट पर दिखेगा 'सूर्य तिलक'
  • 12 बजे होगा रामलला का सूर्य तिलक
  • तीसरी मंजिल पर लगाए उपकरणों का ट्रायल पूरा

Ayodhya Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या के राम मंदिर में 500 साल बाद पहली रामनवमी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। अयोध्या में इस बार की रामनवमी बेहद खास और ऐतिहासिक होगी।

जिसको लेकर अब राम मंदिर ट्रस्ट ने भी तैयारियां तेज कर दी है। आज यानि 9 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। वहीं, 17 अप्रैल को राम नवमी और दुर्गा नवमी मनाई जाएगी। राम मंदिर में पहली राम नवमी का खास आकर्षण रामलला का सूर्य तिलक होगा।

राम नवमी के दिन दोपहर में ठीक 12 बजे सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी, जिससे उनका सूर्य तिलक होगा।

   रामनवमी के ही दिन होगा सूर्य तिलक

बताया जा रहा है कि रामलला के अभिषेक की खास बात यह है कि ये सूर्य तिलक रामनवमी के दिन ही होगा। ये सूर्य तिलक वैज्ञानिकों ने मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थापित किया है। वहीं, दूसरी मंजिल पर एक मिरर और एक लेंस स्थापित किया गया है।

आखिर में सूर्य की रोशिनी तिलके के रूप में रामलला की मूर्ति के मस्तक पर लग जाएगी। बता दें कि ये दृश्य सिर्फ 3-4 मिनट तक ही रहेगा।

   12 बजे होगा रामलला का सूर्य तिलक

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने बताया कि जब मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था तो उस दौरान यह निर्णय लिया गया था कि रामलला के विराजमान होने के बाद आने वाले पहले रामनवमी के दिन प्रभु राम के मस्तिष्क पर सूर्य तिलक किया जाएगा।  यह सूर्य तिलक रामनवमी के दिन दोपहर 12:00 किया जाएगा।

   तैयारियों में जुटे रुड़की के वैज्ञानिक

भगवान राम सूर्यवंशी माने जाते हैं। ऐसे में राममंदिर के निर्माण के समय यह प्रस्ताव रखा गया कि वैज्ञानिक विधि से ऐसा प्रबंध किया जाए कि रामनवमी के दिन दोपहर में सूर्य की किरणें सीधे रामलला की मूर्ति पर ऐसी पड़ें, जैसे उनका अभिषेक कर रहीं हों।

इसके लिए रुड़की के सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अनूठा सिस्टम तैयार किया है। मिरर, लेंस और पीतल के प्रयोग से बने इस सिस्टम के लिए किसी बैटरी या बिजली की जरूरत नहीं होगी।

वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट को सूर्य रश्मियों का तिलक कहा है। यह सकुर्लर तिलक 75 मिमी का होगा, जो रामनवमी के दिन दोपहर में तीन से चार मिनट के लिए भगवान राम के माथे को सुशोभित करेगा।

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