Raksha Bandhan 2022: भारत की इस जगह नहीं मनाया जाता रक्षाबंधन का त्योहार, जानिए बड़ी वजह

Raksha Bandhan 2022: भारत की इस जगह नहीं मनाया जाता रक्षाबंधन का त्योहार, जानिए बड़ी वजह

Raksha Bandhan 2022: रक्षाबंधन का त्योहार पूरे देश में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2022) का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। लेकिन भारत देश में एक ऐसा जगह भी है जहां रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2022) का त्योहार नहीं मनाया जाता है। यहां के लोग 12वीं सदी से रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाते है। हम बात कर रहे है, गाजियाबाद से 30 किमी दूर स्थित मुरादनगर के सुराना गांव की। यहां बहने अपने भाई को राखी नहीं बांधती है। लेकिन गांव की बहू अपने भाइयों को राखी बांधती है। रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2022) के दिन गांव के लोग गांव छोड़कर चले जाते है। इस दिन को ग्रामीण काला दिन मानते है।

अहीरों ने बनाया था गांव

सुराना गांव पहले सोनगढ़ के नाम से जाना जाता था। बताया जाता हैं कि गांव को अहीरो ने ही बसाया था। गांव में छाबड़िया गोत्र के चंद्रवंशी अहीर क्षत्रियों का एक विशाल ठिकाना था। गांव का नाम अहीर राणाओं के नाम पर ही रखा गया था। वर्तमान में सुराना गांव की आबादी 22 हजार के करीब है। गांव के लोग रक्षांबंधन (Raksha Bandhan 2022)  के दिन को अपशगुन मानते है। हालांकि जो लोग बाद में गांव में रहने आए वह यह त्योहार मनाते है। लेकिन गांव के पुराने लोग यह त्योहार (Raksha Bandhan 2022)  नहीं मनाते है।

क्यों नहीं मनाया जाता रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2022) 

गांव के ग्रामीणों के अनुसार सैकड़ों साल पहले राजस्थान से आए पृथ्वीराज चौहान के वंशज सोन सिंह राणा ने हिंडन नदी के किनारे डेरा डाला था। जब मोहम्मद गौरी को पता चला कि सोहनगढ़ में पृथ्वीराज चौहान के वंशज रहते हैं, तो उसने रक्षाबंधन वाले दिन सोहनगढ़ पर हमला कर औरतों, बच्चों, बुजुर्ग और जवान युवकों को हाथियों के पैरों तले जिंदा कुचलवा दिया था। गांव में मोहम्मद गोरी ने कई बार आक्रमण किए, लेकिन हर बार उसकी सेना गांव में घुसने के दौरान अंधी हो जाती थी। क्योंकि देवता इस गांव की रक्षा करते थे। वहीं रक्षाबंधन के दिन देवता गंगा स्नान करने चले गए थे, जिसकी सूचना मोहम्मद गौरी को लग गई और उसी का फायदा उठाकर मोहम्मद गोरी ने इस गांव पर हमला बोल दिया था।

एक कहानी यह भी

गांव के अन्य निवासियों के अनुसार सन 1206 में रक्षाबंधन के दिन हाथियों द्वारा मोहम्मद गौरी ने गांव में आक्रमण किया था। आक्रमण के बाद यह गांव फिर बसा। क्योंकि गांव की रहने वाली एक महिला जसकौर उस दिन अपने घर गई हुई थी, इस दौरान जसकौर गर्भवती थी, जो कि गांव में मौजूद न होने के चलते बच गई। बाद में जसकौर ने दो बच्चों लकी और चुंडा को जन्म दिया और दोनों बच्चे ने बड़े होकर वापस सोनगढ़ को बसाया।

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