Rajiv Gandhi Death Anniversary : भाई की मौत के बाद राजनीति में आए थे राजीव गांधी, मजबूरी में बने थे प्रधानमंत्री

Rajiv Gandhi Death Anniversary : भाई की मौत के बाद राजनीति में आए थे राजीव गांधी, मजबूरी में बने थे प्रधानमंत्री

Rajiv Gandhi Death Anniversary : भारत के लिए आज का दिन वो काला दिन था, जब देश के पहले युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Death Anniversary) की हत्या कर दी गई थी। राजीव गांधी के जन्म के तीन साल बाद देश को आजादी मिली थी। राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Death Anniversary) ने न सिर्फ देश की विरासत संभाली बल्कि देश के लिए तकनीक और वैश्विक बुलंदिया तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाई। राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Death Anniversary) की मां इंदिरा गांधी भले ही देश की प्रधानमंत्री रही हो, लेकिन वह बचपन से ही राजनीति से दूर रहे। यही कारण रहा की वह एक एयरलाइंस कंपनी में पायलट की नौकरी करते थे।

राजीव गांधी को रास नही आया किताबी ज्ञान

जब देश में इमरजेंसी लगी थी। उस दौरान इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। इंदिरा गांधी का पद जाने के बाद राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Death Anniversary) विदेश चले गए थे, जहां उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने लगे। लेकिन उन्हें किताबी ज्ञान रास नहीं आया, इसलिए वह लंदन में पढ़ाई करने चलते गए। लेकिन वहां भी उनका मन नहीं लगा। इसके बाद राजीव ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया, लेकिन इसमें में भी उनका दिल नहीं लगा। इसके बाद वह भारत लौट आए और दिल्ली के फ्लाइंग क्लब में पायलट की ट्रेनिंग ली।

पायलट से की करियर की शुरूआत

राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) ने अपने करियर की शुरूआत पायलट के तौर पर की थी। राजीव गांधी, इंदिरा गांधी के बडे बेटे थे। उन्हें राजनीति में कोई रूचि नहीं थी। वही उनका छोटा भाई संजय गांधी अमेठी से सांसद था। लेकिन एक हवाई दुर्घटना के दौरान उनकी मौत हो गई थी। भाई की मौत के बाद राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Death Anniversary) ने राजनीति में कदम रखा। राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) ने 1980 में अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीता। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी देश के सातवें प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Death Anniversary) भारत की राजनीति के इतिहास के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री थें। राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) ही भारत में कम्प्यूटर क्रांति लेकर आए थे।

चुनावी रैली में हुई राजीव गांधी की हत्या

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी रैली के दौरान आत्मघाती हमलाकर राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Death Anniversary) की हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि राजीव गांधी की हत्या (Rajiv Gandhi Death Anniversary) की साजिश पहले से ही रची गई थी। मद्रास में वीपी सिंह की सभा में आत्मघाती दस्ते की ट्रेनिंग के तौर पर मानव बम बनाकर 9 लोगों को सुरक्षा घेरा तोड़ने की ट्रेनिंग दी गई थी। इसमें धनु और सुबा नाम की दो महिलाओं ने वीपी सिंह को माला भी पहनाई थी। जब हमलावारों को अखबरों के माध्यम से राजीव गांधी के चुनावी कार्यक्रम की सूचना मिली तो 21 मई 1991 को राजीव गांधी के श्रीपेरंबदूर की यात्रा वाले दिन उनकी हत्या करने की साजिश रची गई। राजीव गांधी की इस रैली में धनु और सुबा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नजदीक पहुंच कर धमाके को अंजाम दे दिया और एक पल में देश ने अपना प्रधानमंत्री खो दिया।

राजीव गांधी के बलिदान दिवस पर कमलनाथ का संदेश

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राजीव गांधी के बलिदान दिवस (Rajiv Gandhi Death Anniversary) पर संदेश देते हुए कहा कि राजीव गांधी ने देश को विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए 21वीं सदी के भारत की नींव रखी। आज जिस डिजिटल इंडिया (Digital India) की बात पूरे देश में हो रही है। उसकी आधारशिला राजीव गांधी ने दूरसंचार और कंप्यूटर क्रांति से रखी थी। देश में लोकतंत्र की जड़े गांव-गांव तक मजबूत करने के लिए पंचायती राज व्यवस्था और संविधान की ताकत राजीव गांधी ने ही दी थी। देश की सेवा करते हुए उन्होने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।

यूथ अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने दिया संदेश

मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने आज एक वीडियो जारी कर बताया कि राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Death Anniversary) एक नाम नहीं एक क्रांति है, जिन्होंने आधुनिक भारत का विजन देखा। युवाओं की आवाज को बुलंद किया, 18 साल की उम्र में वोट करने का अधिकार दिया। आइए 21 मई को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें याद करें एवं भारत जोड़ो अभियान की शुरुआत करें।

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