SRC NGO Ghotala: भोपाल में दर्ज FIR रायपुर CBI को ट्रांसफर, IAS अफसरों के खिलाफ जांच तेज, आज जब्त होंगे दस्तावेज

SRC NGO Ghotala: भोपाल में दर्ज SRC NGO घोटाले की FIR अब रायपुर CBI को ट्रांसफर कर दी गई है। IAS अधिकारियों पर करोड़ों की गड़बड़ी, वेतन गबन और दस्तावेजों के गायब होने के आरोप हैं।

SRC NGO Ghotala

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हाइलाइट्स 

  • SRC घोटाले की CBI जांच तेज
  • IAS अफसरों के नाम FIR में
  • दस्तावेज गायब, शक गहराया

SRC NGO Ghotala: छत्तीसगढ़ में एक बार फिर पूर्व आईएएस अधिकारियों के एक पुराने एनजीओ घोटाले की फाइलें खुलने जा रही हैं। समाज कल्याण विभाग से जुड़े राज्यश्रोत (निःशक्तजन) संस्थान (SRC) में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी और कर्मचारियों के वेतन में अनियमितता को लेकर साल 2020 में भोपाल में दर्ज हुई FIR को अब रायपुर सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है। जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है और आज, सोमवार को CBI SRC से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त करने वाली है।

CBI ने शुक्रवार को दी थी दस्तावेजों की लिस्ट

CBI की टीम शुक्रवार को समाज कल्याण संचालनालय रायपुर पहुंची थी, जहां अधिकारियों को SRC से संबंधित दस्तावेजों की सूची सौंपी गई। जवाब में संचालनालय ने इन दस्तावेजों को सोमवार यानी आज सौंपने की सहमति दी थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, CBI दस्तावेजों को जब्त कर अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी।

हालांकि चौंकाने वाली जानकारी यह भी सामने आई है कि SRC से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हैं। इससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है और जांच में बाधा की आशंका जताई जा रही है।

FIR में 12 बड़े नाम, लेकिन मंत्री का नाम गायब

CBI द्वारा 5 फरवरी 2020 को दर्ज की गई FIR में 12 नाम शामिल हैं, जिनमें अधिकांश वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। ये नाम हैं: विवेक ढांढ, एमके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीष पांडेय, पीपी सोती, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय और पंकज वर्मा।

इन अधिकारियों पर SRC के माध्यम से सरकारी फंड का दुरुपयोग, कर्मचारियों के वेतन में गबन, और प्रशासनिक अनियमितताएं जैसे गंभीर आरोप हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 2004 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री रहीं रेणुका सिंह, जिनका नाम SRC की प्रबंध समिति में सबसे ऊपर है और जिनके दस्तखत भी दर्ज हैं, उनका नाम FIR में नहीं है। यह बात अब जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही है।

SRC: जिस उद्देश्य से बना, उससे भटका

राज्यश्रोत (निःशक्तजन) संस्थान को दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और कल्याण के लिए बनाया गया था। इसे समाज कल्याण विभाग के संरक्षण में गैर-लाभकारी संस्था के रूप में चलाया जाना था। लेकिन अब सामने आ रही जानकारियों से यह स्पष्ट हो रहा है कि SRC का इस्तेमाल वित्तीय लाभ, नियुक्तियों में अनियमितता, और प्रशासनिक खेल के लिए किया गया।

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जांच से उठ रहे बड़े सवाल

अब जब CBI ने केस को सक्रिय रूप से अपने हाथ में लिया है और दस्तावेजों की जब्ती शुरू हो रही है, तो SRC से जुड़े कई अनसुलझे सवालों पर रोशनी पड़ सकती है। लेकिन इस बात को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता कि दस्तावेजों का गायब होना, और कुछ प्रमुख नामों का FIR में न होना, पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है।

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