रायपुर में फर्जी पुलिसकर्मी आशीष घोष बेनकाब: ट्रांसफर-पोस्टिंग का धंधा, अफसरों से नजदीकी और करोड़ों की वसूली का खुलासा

Raipur Fake Police Ashish Ghosh : रायपुर में फर्जी पुलिसकर्मी आशीष घोष बेनकाब। आरोपी ने फर्जी आईडी बनाकर थानों और क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर-पोस्टिंग का धंधा चलाया।

Raipur Fake Police Ashish Ghosh

Raipur Fake Police Ashish Ghosh

हाइलाइट्स 

  • फर्जी आईडी से अफसरों तक पहुंच
  • पोस्टिंग रैकेट से करोड़ों की वसूली
  • 6 सितंबर तक पुलिस रिमांड

Raipur Fake Police Ashish Ghosh: छत्तीसगढ़ की राजधानी में पुलिस महकमे की साख पर सवाल खड़े कर देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पुरानी बस्ती पुलिस ने जिस शख्स को पकड़कर बेनकाब किया है, वह खुद को पुलिसकर्मी बताकर पिछले कई सालों से थानों, क्राइम ब्रांच और ट्रैफिक विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल (transfer posting scam) चला रहा था।

आरोपी का नाम आशीष घोष उर्फ आशीष दास उर्फ आशीष शर्मा है, जो कई पुलिस अधिकारियों और थानेदारों का एजेंट बनकर वसूली और केस सेटलमेंट (case settlement) का कारोबार कर रहा था।

[caption id="attachment_890248" align="alignnone" width="1117"]Raipur Fake Police Ashish Ghosh रायपुर फर्जी पुलिस आशीष घोष की फेक ID[/caption]

फर्जी आईडी और अफसरों के घर तक पहुंच

जांच में पता चला है कि आशीष ने एसीबी-ईओडब्ल्यू के एक सिपाही की आईडी कार्ड की फोटो लेकर उसमें अपनी तस्वीर लगाकर फर्जी पहचान पत्र (fake police ID) तैयार किया था। इतना ही नहीं, वह इस फर्जी पहचान के दम पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के घरों तक बेरोकटोक पहुंचता और खुद को उनका करीबी बताकर लोगों से धौंस जमाता। पुलिस की गाड़ियों में बैठकर पेट्रोलिंग (patrolling with police) करने और छापेमारी में शामिल होने तक के सबूत मिले हैं।

वसूली का खेल और पोस्टिंग रैकेट

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशीष ने पिछले 10 साल में कई सिपाहियों, हवलदारों और एसआई की पोस्टिंग अलग-अलग थानों और ब्रांचों में कराई। इसके एवज में वह उनसे हर माह मोटी रकम वसूलता था। किसी महीने पैसे न मिलने पर वह अधिकारियों और नेताओं का नाम लेकर धमकी (threatening for posting) देता और उनका ट्रांसफर भी करवा देता। आरोप है कि वह 10 से 12 लाख रुपये तक लेकर अधिकारियों की पोस्टिंग कराने का सौदा करता था।

थानेदारों का खास एजेंट और केस सेटलमेंट

आशीष थानों में आने वाले धोखाधड़ी, जुआ-सट्टा और अन्य मामलों में थानेदारों के लिए लाइजनिंग करता था। कई मामलों में कमीशन लेकर केस को दबाने या सेटल करने (case manipulation) की भी जानकारी सामने आई है।

वह क्राइम ब्रांच के नाम पर रसूखदार व्यापारियों और अपराधियों को बचाने के लिए सक्रिय था। पुलिस के पास मिले मोबाइल डेटा में ऐसे चैट्स और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स हैं, जिसमें वह सिपाहियों और अधिकारियों को धमकाते और पैसे मांगते सुना गया है।

गिरफ्तार, रिमांड और आगे की जांच

आरोपी को पुरानी बस्ती पुलिस ने पकड़ा और उसके पास से नकदी, सोने के आभूषण और फर्जी दस्तावेज बरामद किए। कोर्ट ने उसे 6 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस का मानना है कि इस रैकेट में केवल आरोपी ही नहीं बल्कि कुछ पुलिसकर्मी और राजनीतिक रसूखदार भी शामिल हो सकते हैं। मोबाइल डेटा की साइबर जांच के बाद और बड़े नाम सामने आने की संभावना है।

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