रेलवे भूमि अधिग्रहण विवाद: बिना सुनवाई आपत्ति निरस्त करने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और रेलवे बोर्ड को भेजा नोटिस

CG High Court : रेलवे द्वारा बेलगहना गांव में भूमि अधिग्रहण के दौरान भू-अर्जन अधिकारी ने बिना सुनवाई आपत्ति को निरस्त कर दिया।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

हाइलाइट्स 

  • भूमि अधिग्रहण विवाद पर हाईकोर्ट सख्त
  • राज्य शासन और रेलवे बोर्ड को नोटिस
  • बिना सुनवाई आपत्ति निरस्त करने पर सवाल

CG High Court : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन और रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामला ग्राम बेलगहना का है, जहां रेलवे द्वारा विद्युत सब स्टेशन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

भू-अर्जन अधिकारी ने बिना सुनवाई आपत्ति खारिज की

जानकारी के अनुसार, रेलवे प्रशासन की मांग पर भू-अर्जन अधिकारी द्वारा ग्राम बेलगहना में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई और इसकी प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद भू-स्वामी प्रदीप अग्रवाल ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति में कहा गया कि संबंधित भूमि कृषि उपयोग की है और भू-स्वामी का परिवार इसी पर निर्भर है।

साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि रेलवे विभाग के पास उसी क्षेत्र में पहले से पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। इसके बावजूद भू-अर्जन अधिकारी ने बिना समुचित सुनवाई के आपत्ति को निरस्त कर दिया, जिससे मामला विवादित हो गया।

याचिकाकर्ता ने उठाया विधिक सवाल

भू-स्वामी प्रदीप अग्रवाल ने अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि रेलवे अधिनियम की धारा 20(D) के तहत भू-अर्जन अधिकारी को प्रत्येक आपत्ति पर उचित विचार करने और संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने की बाध्यता है।

बिना सुनवाई आपत्ति को खारिज करना कानून के विरुद्ध है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि अधिकारी का यह कदम मनमाना है, जिससे प्रभावित पक्ष को न्याय से वंचित किया गया है।

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हाईकोर्ट ने राज्य शासन और रेलवे बोर्ड से मांगा जवाब

मामले पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने रेलवे बोर्ड और राज्य शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों में प्रशासन को पारदर्शिता और निष्पक्षता का पालन करना अनिवार्य है।

गांव के लोगों में असंतोष

ग्राम बेलगहना के ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित भूमि वर्षों से कृषि योग्य रही है और कई परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है। उनका कहना है कि रेलवे के पास पहले से ही खाली भूमि उपलब्ध है, ऐसे में नई भूमि का अधिग्रहण अनुचित है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि हाईकोर्ट से इस मामले में न्याय मिलेगा और पारदर्शी सुनवाई सुनिश्चित होगी।

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