Rabindranath Tagore Jayanti 2023: रवींद्रनाथ टैगोर जयंती आज, जानें उनके जीवन से जुड़ी ये रोचक बातें

Rabindranath Tagore Jayanti 2023: देश के साहित्य जगत के लिए सात मई का दिन इतिहास में सुनहरे शब्दों में दर्ज है। 1861 में आज ही के...

Rabindranath Tagore Jayanti 2023: रवींद्रनाथ टैगोर जयंती आज, जानें उनके जीवन से जुड़ी ये रोचक बातें

Rabindranath Tagore Jayanti 2023: देश के साहित्य जगत के लिए सात मई का दिन इतिहास में सुनहरे शब्दों में दर्ज है। 1861 में आज ही के दिन गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ था, जिन्हें एक कवि, लघु कथा लेखक, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंध लेखक और चित्रकार के तौर पर युग पुरुष का दर्जा हासिल है। आइए जानते हैं रवींद्रनाथ टैगोर के जन्मदिन पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें।

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म

7 मई 1861 को कोलकाता में देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के घर एक बालक ने जन्म लिया जिसका नाम था रवींद्रनाथ, बचपन में उन्हें प्यार से सब उन्हें ’रबी‘ बुलाते थे। अपने सभी 13 भाई-बहनों में सबसे छोटे रवीन्द्रनाथ टैगोर को बालपन से परिवार में साहित्यिक माहौल मिला, इसी वजह से उन्हें साहित्य से बहुत लगाव रहा।

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रवींद्रनाथ टैगोर के नोबल पुरस्कार की कहानी

टैगोर पहले गैर यूरोपीय थे जिन्हें साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था। हालांकि टैगोर ने इस नोबेल पुरस्कार को सीधे स्वीकार नहीं किया, बल्कि उनकी जगह पर ब्रिटेन के एक राजदूत ने पुरस्कार लिया था। टैगोर को ब्रिटिश सरकार ने ‘नाइट हुड’ यानी ‘सर’ की उपाधि से भी नवाजा था लेकिन 1919 में हुए जलियांवाला बाग कांड के बाद टैगोर ने इस उपाधि को लौटा दिया।

छोटीं सी उम्र में लिखी पहली कविता

बहुमुखी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगोर ने आठ वर्ष की उम्र में कविता लिखना शुरू कर दिया था, बल्कि जब वह 16 साल के थे तब उन्होंने छद्म नाम ‘भानुसिंह’ के तहत कविताओं का अपना पहला संग्रह जारी किया। वो भारत ही नहीं एशिया के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें साहित्य के लिए 1913 में अपनी रचना गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आज भी रवींद्र संगीत बांगला संस्कृति का अभिन्न अंग माना जाता है।

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टैगोर ने लिखे कई देशों के राष्ट्रगान

रवींद्रनाथ टैगोर एक प्रतिष्ठित कवि, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार समेत साहित्य की कई विधाओं में निपुण थे। टैगोर दुनिया के संभवत: एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया, भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ टैगोर की ही रचनाएं हैं। कहा जाता है कि श्रीलंका के राष्ट्रगान का एक हिस्सा भी उनकी कविता से प्रेरित है।

बैरिस्टर बनना चाहथे थे टैगोर

रवींद्रनाथ टैगोर बैरिस्टर बनना चाहते थे, 1878 में उन्होंने अपने इस लक्ष्य को पाने के लिए इंग्लैंड के ब्रिजस्टोन पब्लिक स्कूल में एडमिशन लिया। वह कानून की पढ़ाई के लिए लंदन कॉलेज यूनिवर्सिटी भी गए लेकिन वहां पढ़ाई पूरी किए बिना ही 1880 में वे वापस लौट आए।

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