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हाइलाइट्स
बीयू ने की परियोजना अधिकारी नरेंद्र त्रिपाठी की सेवाएं समाप्त
नाराज कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से काम बंद
बीयू से संबद्ध 8 जिलों के कॉलेजों में चल रहे सप्लीमेंट्री एग्जाम
BU Bhopal Employees Protest: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी यानी BU भोपाल के सभी कर्मचारी गुरुवार को हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारी परियोजना अधिकारी नरेंद्र त्रिपाठी की सेवाएं समाप्त करने की बात से नाराज हैं।
कर्मचारियों ने चेतावनी (BU Bhopal Employees Protest) दे दी है कि जब तक सेवाएं बहाल नहीं की जाती, वे काम पर नहीं लौटेंगे। इधर ड्राइवरों ने भी सप्लीमेंट्री एग्जाम के पेपर ले जाने से मना कर दिया है।
8 जिलों के एग्जाम पर पड़ेगा असर
हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल जैसे 8 जिलों में बीयू से संबद्ध कॉलेज है। यहां हजारों स्टूडेंट पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान में इन कॉलेजों में सप्लीमेंट्री एग्जाम चल रहे हैं। हड़ताल का बड़ा असर इसी परीक्षा पर पड़ सकता है।
हड़ताल (BU Bhopal Employees Protest) के चलते बीयू के ड्राइवरों ने सप्लीमेंट्री एग्जाम के पेपर ले जाने से मना कर दिया है।
नियुक्ति गलत तो अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं
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बीयू कर्मचारी संघ (BU Bhopal Employees Protest) ने कहा कि तत्कालीन कुलपति और रजिस्ट्रार ने नियमों को देखकर ही नियुक्तियां दी होंगी। अब 20 साल बाद आप किसी की सेवाएं समाप्त करोगे तो उसका परिवार कहां जाएगा।
विश्वविद्यालय महासंघ के सचिव लखन परमार ने कहा कि यदि नियुक्ति गलत है तो कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारी पर ही क्यों, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
सेवाएं बहाल होने तक काम पर नहीं लौटेंगे कर्मचारी
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बीयू कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरदेव सिंह ने कहा कि ये कर्मचारियों के साथ अन्याय है। जब तक परियोजना अधिकारी नरेंद्र त्रिपाठी की सेवाएं बहाल नहीं होती तब तक बीयू के कर्मचारी (BU Bhopal Employees Protest) काम पर नहीं लौटेंगे।
बीयू ने खुद माना कि प्रोजेक्ट ऑफीसर की नियुक्ति है अवैधानिक
भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर यह स्वीकार किया था कि प्रोजेक्ट आफीसर के पद पर नरेन्द्र त्रिपाठी की नियुक्ति अवैधानिक है। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय इस संबंध में कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
कोर्ट ने कहा था कि चूंकि विश्वविद्यालय ने स्वयं गलत नियुक्ति की बात स्वीकार कर ली है, इसलिए अब याचिका में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता। इस मत के साथ नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका निरस्त कर दी थी।
आपात बैठक बुलाकर सेवाएं की समाप्त
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बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (BU) में 163 कर्मचारियों की विवादित नियुक्तियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। बीयू ने सतत शिक्षा विभाग में पदस्थ परियोजना अधिकारी डॉ. नरेंद्र त्रिपाठी की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया और इस संबंध में बुधवार को कार्यपरिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई।
राजभवन पहले ही प्रकरण कर चुका है समाप्त
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इस बीच बंसल न्यूज डिजिटल को राजभवन का लेटर भी मिला। जिसमें इस प्रकरण को पहले ही समाप्त कर दिया गया था। यह लेटर 17 अक्टूबर 2022 का है। सवाल ये है कि परियोजना अधिकारी नरेंद्र त्रिपाठी की सेवाएं कोर्ट ने समाप्त नहीं की। बल्कि हाई कोर्ट ने इसके लिये यूनिवर्सिटी को स्वतंत्र छोड़ा था। इधर राजभवन पहले ही इस प्रकरण को समाप्त कर चुका है, तो क्या ऐसे में यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद को ये अधिकार है कि वह राजभवन से अलग हटकर कोई निर्णय ले सके।
स्टेप वाय स्टेप औरों पर भी होगी कार्रवाई
इधर बैठक में कुलपति प्रो. एसके जैन ने सदस्यों से कहा कि विश्वविद्यालय ने डॉ. त्रिपाठी की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी देने बैठक बुलाई है।
कार्यपरिषद सदस्य ने पूछा कि क्या ऐसे और भी मामले हैं या एक ही प्रकरण है। इस पर कुलपति प्रो. एसके जैन ने कहा कि अभी यह शुरुआत है। आगे और भी हैं। स्टेप वाय स्टेप कार्रवाई की जाएगी।
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