Pros And Cons of Multiple Bank Accounts: कई बैंक खाते रखने के क्‍या हैं नफा-नुकसान, जानिए आपको कितने अकाउंट खुलवाना चाहिए

Pros And Cons of Multiple Bank Accounts: कई बैंक खाते रखने के क्‍या हैं नफा-नुकसान, जानिए आपको कितने अकाउंट खुलवाना चाहिए

Pros And Cons of Multiple Bank Accounts: What are the pros and cons of having multiple bank accounts, know how many accounts you should open

Pros And Cons of Multiple Bank Accounts: खाता यानि कि, बैंक अकाउंट डिजिटलाइजेशन के दौर में बहुत जरूरी हो गया है. तकनीकी विकास,संसाधन की बढ़ती उपलब्धता  ओर बढ़ती बैंकों की संख्या के चलते लगभग हर व्‍यक्ति के पास एक से ज्‍यादा बैंक अकाउंट है. अगर आपके भी कई बैंक खाते हैं तो आपको एक बार इनकी उपयोगिता पर विचार जरूर कर लेना चाहिये. आमतौर पर होता यह है कि एक या दो बैंक अकाउंट्स से ही ज्‍यादातर लेनदेन किया जाता है, बाकि अकाउंट का उपयोग न के बराबर किया जाता है.

अधिक बैंक खाते होने से आपको फायदा कम और नुकसान ज्‍यादा हैं. कई खाते होने से इनको मैनेज करना जहां मुश्किल होता है, वहीं बैंक खातों पर कई तरह के चार्ज भी लेता है. इससे आप पर बिना वजह आर्थिक बोझ बढ़ता है. यही नहीं ज्‍यादा बैंक खाते होने से साइबर फ्रॉड होने के चांस भी बढ़ जाते हैं.

1-ज्‍यादा अकाउंट, ज्‍यादा चार्जेज Pros And Cons of Multiple Bank Accounts

बैंक अकाउंट मेनटेंन रखने के लिये चार्जिज (Bank Charges) लिए जाते हैं. जैसे एसएमएस शुल्‍क, सर्विस चार्ज इत्‍यादि. अगर ज्‍यादा बैंक अकाउंट आप रखेंगे तो आपको ज्‍यादा चार्ज चुकाने होंगे. इसलिये अपने बैंक अकाउंट की लिस्‍ट को जितना छोटा रखेंगे, उतना ही आपकी जेब के लिये फायदेमंद होगा.

2-क्रेडिट स्‍कोर पर नकारात्‍मक असर Pros And Cons of Multiple Bank Accounts

एक से अधिक निष्क्रिय बैंक खाते होने से आपके क्रेडिट स्कोर (Credit Score) पर भी असर पड़ता है. न्‍यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) नहीं होने पर आपको बैंक पेनल्‍टी लगाता है. जितनी आपको पेनल्‍टी लगेगी, उतनी ही बार आपका क्रेडिट स्‍कोर प्रभावित होगा. इसलिये गैर-जरूरी ओर निष्क्रिय हो चुके खातों को तुरंत बंद करा दें.

3-ITR फाइल करने में माथापच्‍ची Pros And Cons of Multiple Bank Accounts

आपके पास जितने कम बैंक खाते होंगे आपको आयकर रिटर्न (Income Tax Return) भरने में बहुत आसानी होती है. आईटीआर में हर बैंक खाते की पूरी डिटेल देनी होती है. कई बैंकों में अकाउंट होने पर आयकर रिटर्न भरते वक्‍त सभी का हिसाब-किताब देना होगा. अगर किसी खाते से आपको वित्‍त वर्ष में 10,000 रुपये से ज्‍यादा ब्‍याज मिलेगा, तो उस पर आयकर देना होगा. अगर आपके कई अकाउंट होंगे तो सब अकाउंट की डिटेल हासिल करने में आपको काफी भागदौड़ करनी होगी. अगर एक या दो ही बैंक खाते होंगे तो आपको कम माथापच्‍ची करनी होगी.

4-फ्रॉड होने की संभावना ज्‍यादा Pros And Cons of Multiple Bank Accounts

यदि किसी सेविंग या करंट अकाउंट में एक साल तक कोई लेनदेन नहीं होता है तो वह निष्क्रिय हो जाता है. दो साल तक ट्रांजैक्शन नहीं होने पर वह डॉरमेंट अकाउंट (Dormant Account) में तब्दील हो जाता हैं ऐसे बैंक अकाउंट के साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है. धोखाधड़ी करने वाले लोग कई बार बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर या किसी अन्‍य तरीके से इन खातों को दोबारा चालू करा लेते हैं.

5-आर्थिक नुकसान भी Pros And Cons of Multiple Bank Accounts

इनएक्टिव अकाउंट ( Inactive Account ) का इस्‍तेमाल नहीं करने पर आपको आर्थिक नुकसान भी हो सकता है. लगभग हर बैंक मिनिमम बैलेंस रखने को कहता है.  मान लो अगर आपके पास चार बैंक खाते हैं, जिनमें मिनिमम बैलेंस 10 हजार रुपए होने चाहिए तो आपको 40 हजार रुपए का कोई लाभ नहीं मिल रहा है. यहीं पैसा अगर सेविंग अकाउंट में हो तो आपको न्यूनतम 4 फीसदी का ब्याज मिलेगा. इस लिहाज से आपको लगभग 1600 रुपए ब्‍याज मिलेगा. अगर इन खातों को बंद कर आप रकम को म्यूचुअल फंड ( Mutual Fund ) के निवेश में लगा देते हैं तो यहां आपको कम से कम 10 फीसदी का रिटर्न मिल सकता है.

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