Presidential Election 2022: जानिए उस अकेले व्यक्ति को, जो फांसी की सजा भी माफ कर सकता है ,जानिए कैसे

Presidential Election 2022: जानिए उस अकेले व्यक्ति को, जो फांसी की सजा भी माफ कर सकता है ,किसने दी ये ताकत

Presidential Election 2022

Presidential Election 2022/new delhi:  देश को नए राष्ट्रपति (Presidential Election 2022) मिलने वाले हैं।जानकारों की माने तो NDA की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) अगली महामहिम होंगी।बता दें देश के वर्तमान संवैधानिक मुखिया यानी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म होने जा रहा है। इस मौके पर जानिए देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर काबिज राष्ट्रपति के पास क्या अधिकार और पॉवर होती हैं।बता दें इनके पास इतनी ताकत होती है कि, सुप्रीम कोर्ट की दी गई हुई फांसी की सजा भी माफ कर सकते हैं।

फांसी की सजा के अलावा भी भारत के संविधान में राष्ट्रपति को कई शक्तियां मिली हैं जिनका वो इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें सेना से लेकर कानून पर मुहर लगाने तक के अधिकार शामिल हैं।देश में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की नियुक्ति से लेकर फांसी की सजा पर मुहर लगाने तक, जानिए राष्ट्रपति के पास कौन-कौन सी शक्तियां और अधिकार होते हैं।आइए जानते हैं।

1-नियुक्ति का अधिकार

भारत का राष्ट्रपति देश की नौसेना (Indian Navy), थल सेना (Indian Army) और वायु सेना (Indian Air Force) के सर्वोच्च सेनापति होते हैं।वहीं यह देश के अहम पदों पर बैठे लोगों की नियुक्ति करता है। इनमें भारत के प्रधानमंत्री, उनके सलाहकार, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, सभी राज्यों के राज्यपाल, चुनाव आयुक्त, भारत के नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक और विदेशों में भारतीय राजदूतों की नियुक्ति शामिल है।

2-मनोनीत सांसद बनाने का अधिकार

राष्ट्रपति लोकसभा में ​एंग्लो इंडियन समुदाय के दो व्यक्तियों को सांसद मनोनीत कर सकते हैं हालांकि, यह प्रावधान अब समाप्त हो चुका है। राज्यसभा की बात करें तो यह कला, साहित्य, पत्रकारिता, विज्ञान, के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव रखने वाले 12 सदस्यों को मनोनीत सांसद बनाते हैं।किसी भी देश के साथ कोई संधि या समझौता किया जा रहा है तो यहां राष्ट्रपति का हस्ताक्षर जरूरी होता है।

3-नया अध्यादेश जारी करने की पॉवर

जब संसद के दोनों सदनों में सत्र नहीं चल रहा होता, उस समय संविधान के अनुच्छेद 123 के मुताबिक, राष्ट्रपति नया अध्यादेश जारी कर सकते हैं। संसद सत्र के शुरू होने के 6 हफ्ते तक इसका प्रभाव रहता है।

4-फांसी से क्षमादान की शक्ति

संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार, राष्ट्रपति किसी भी व्यक्ति को क्षमा कर उसे पूर्ण दंड से बचा सकते हैं या फिर उसकी सजा कम करवा सकते हैं। हालांकि एक बार यदि उन्होंने क्षमा याचिका रद्द कर दी तो फिर दुबारा याचिका दायर नहीं की जा सकती। फांसी की सजा पाने वाले कई अपराधियों की क्षमा याचिका राष्ट्रपति तक पहुंचती है। हालांकि इस पर फैसला लेना उनका अधिकार है।यानि कि यह ताकत भारत का संविधान देता है।

5-देश में आपातकाल लगाने का अधिकार

देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास ही होता है। इसमें 3 तरह की इमरजेंसी शामिल होती हैं। पहला, युद्ध या सशस्त्र विद्रोह के दौरान, दूसरा राज्यों के संवैधानिक तंत्र के फेल होने पर और तीसरा वित्तीय आपातकाल। बता दें कि 1962 में भारत चीन युद्ध, 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध और फिर 1975 में इंटरनल एग्रेशन के दौरान देश में इमरजेंसी लगाई गई थी।

6-कानून बनाने की शक्ति

संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में कोई बिल जब पेश किया जाता है तो वहां से पास होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति जरूरी होती है। इसके बिना कोई भी विधेयक कानून नहीं बन सकता। धन विधेयक हो, किसी नए राज्य का निर्माण, सीमांकन हो या भूमि अधिग्रहण के संबंध में कोई विधेयक, राष्ट्रपति की सिफारिश के बगैर संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

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