President House Bagghi : राष्ट्रपति भवन की शान इस बग्घी को लेकर भारत—पाकिस्तान में खिच गई थी तलवारें!

President House Bagghi : राष्ट्रपति भवन की शान इस बग्घी को लेकर भारत—पाकिस्तान में खिच गई थी तलवारें!

President House Bagghi : भारत में 18 जुलाई को राष्ट्रपति का चुनाव होना है। 21 जुलाई को देश को नया राष्ट्रपति मिल जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव के लिए इस बार एनडीए की ओर से द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष की ओर से यशवंत सिंहा उम्मीदवार है। दोनों में से जिसे भी बहुमत मिलेगा वह देश का राष्ट्रपति बनेगा और रायसीना हिल स्थित राष्ट्रपति भवन में रहेगा। आपको बता दें कि राष्ट्रपति भवन में ऐसी कई ऐतिहासिक चीजें है, जिन्हें देखकर आप भी खुश हो जाएंगे। इन्हीं चीजों में से एक है राष्ट्रपति भवन की बग्घी। यह वही बग्घी (President House Bagghi) है जिसको लेकर भारत—पाकिस्तान में तलवारें खिंच गई थी। आज हम आपको राष्ट्रपति भवन की शान मानी जाने वाली बग्घी (President House Bagghi) के इतिहास के बारे में बताने जा रहे है।

बग्घी को लेकर भारत-पाकिस्तान में खींची तलवारें!

बात उस दौर की है जब अंग्रेजों ने भारत से पाकिस्तान को अलग देश बना दिया था। जब भारत—पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तब कई चीजों का बंटवारा हुआ था। इस दौरान वायसराय हाउस की बग्घी (President House Bagghi) कौन रखेगा इसको लेकर दोनों देश आमने सामने आ गए थे। भारत बग्घी (President House Bagghi)  पर अपना हक जता रहा था तो वही पाकिस्तान अपना हक जता रहा था। दोनों ही इस शाही बग्घी (President House Bagghi)  को छोड़ने को तैयार नहीं थें। लेकिन अंत में शाही बग्घी (President House Bagghi)  किसकी होगी इसका फैसला टॉस के जरिए किया गया।

टॉस से हुआ बग्घी का फैसला

शाही बग्घी (President House Bagghi)  किसी होगी इसका फैसला टॉस के माध्यम से किया गया। लेफ्टिनेंट कर्नल ठाकुर गोविंद सिंह और पाकिस्तानी सेना के याकूब खान के बीच टॉस को उछाला गया। और इसमें भारत ने टॉस जीत लिया। इसी तरह राष्ट्रपति भवन की शान शाही बग्घी (President House Bagghi)  भारत की हो गई ।यह शाही बग्घी आज भी राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ाती है।

बग्घी पर चढ़ी है सोने की परत

दरअसल, इस शाही बग्घी (President House Bagghi) पर सोने की परत चढ़ी हुई है। यह बग्घी अंग्रेजों के शासनकाल में वायसराय को मिली थी। इस बग्घी (President House Bagghi)  को घोड़े से खिंचा जाता है। देश की आजादी के बाद कई सालों तक राष्ट्रपति इस शाही बग्घी (President House Bagghi)  में चलते थे। लेकिन अब इसका इस्तेमाल कम हो गया। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में गणतंत्र दिवस परेड में इसी बग्घी (President House Bagghi)  पर बैठकर सलामी दी थी। इसके बाद धीरे—धीरे इसका उपयोग कम हो गया। इसकी जगह हाई सिक्योरिटी वाली कार आ गई।

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