हम परमात्‍मा के अंश हैं इसकी क्‍या पहचान है... इसको लेकर सुनिए क्‍या बोले- प्रेमानंद महाराज

हम परमात्‍मा के अंश हैं इसकी क्‍या पहचान है... इसको लेकर सुनिए क्‍या बोले- प्रेमानंद महाराज

वृंदावनवालेसंतप्रेमानंदमहाराजकेसत्‍संग में दूरदूरसेलोगआतेहैं। सभी लोगअपनीसमस्‍याएं लेकर महाराजजीकेपासआतेहैं और महाराजजीउनसमस्‍याओं को कैसे दूरकरनाहैउनपर कैसे विजयप्राप्‍तकरनीहैयेबतानेकीकोशिशकरतेहैंअब अपने सत्‍संग में लोगों को बतायाप्रेमानंदमहाराजनेबतायाहमारेप्रभुअविनाशीहैं तो हमारास्‍वारूपभीअविनाशीहै। आप देखलीजिएहमसबसुखचाहतेहैंजिसमेंदुखनाममात्रकाभीनहीं हो। क्‍योंकि हमारा पिता सुख सिंधु है। परमात्‍माप्रेमरूपहै, हमभीचाहतेहैंहमेंकोईप्‍यारकरेवो सिर्फ परमात्‍मा ही करता है।

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