वृंदावनवालेसंतप्रेमानंदमहाराजकेसत्संग में दूरदूरसेलोगआतेहैं। सभी लोगअपनीसमस्याएं लेकर महाराजजीकेपासआतेहैं और महाराजजीउनसमस्याओं को कैसे दूरकरनाहैउनपर कैसे विजयप्राप्तकरनीहैयेबतानेकीकोशिशकरतेहैं। अब अपने सत्संग में लोगों को बताया। प्रेमानंदमहाराजनेबतायाहमारेप्रभुअविनाशीहैं तो हमारास्वारूपभीअविनाशीहै। आप देखलीजिए। हमसबसुखचाहतेहैंजिसमेंदुखनाममात्रकाभीनहीं हो। क्योंकि हमारा पिता सुख सिंधु है। परमात्माप्रेमरूपहै, हमभीचाहतेहैंहमेंकोईप्यारकरेवो सिर्फ परमात्मा ही करता है।
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