Mahakumbh Stampede: महाकुंभ भगदड़ जांच मामले में आयोग ने आम जनता से मांगे साक्ष्य, जारी किए नंबर और मेल आईडी

Uttar Pradesh Prayagraj Mahakumbh Stampede Inquiry Update; महाकुंभ मेला 2025 के दौरान संगम नोज पर हुई भगदड़ की घटना की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने आम जनता से साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की है।

Mahakumbh Stampede: महाकुंभ भगदड़ जांच मामले में आयोग ने आम जनता से मांगे साक्ष्य, जारी किए नंबर और मेल आईडी
हाइलाइट्स 
  • महाकुंभ भगदड़ जांच मामले में आयोग ने आम जनता से मांगे साक्ष्य
  • जारी किए नंबर और मेल आईडी
  • 29 जनवरी को संगम में हुई थी भगदड़

Mahakumbh Stampede: महाकुंभ मेला 2025 के दौरान संगम नोज पर हुई भगदड़ की घटना की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने आम जनता से साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की है। आयोग ने इसके लिए एक मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जारी की है, जहां लोग घटना से संबंधित वीडियो, तस्वीरें या अन्य साक्ष्य भेज सकते हैं।

आयोग ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस घटना से जुड़े तथ्य, वीडियो या अन्य साक्ष्य हैं, तो वे उन्हें 10 दिनों के भीतर हजरतगंज स्थित जनपथ सचिवालय के कमरा नंबर 108 में जमा करा सकते हैं। इसके अलावा, साक्ष्य ईमेल आईडी mahakumbhcommission@gmail.com या व्हाट्सएप नंबर 9454400596 पर भी भेजे जा सकते हैं।

क्या हुआ था महाकुंभ भगदड़ में?

महाकुंभ मेला 2025 के दौरान मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पहले संगम नोज पर भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। घटना के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग को यह जांच करने का जिम्मा दिया गया है कि क्या इस घटना के पीछे कोई साजिश थी या यह केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी।

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विपक्ष का सरकार पर हमला

इस घटना को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमला बोल रहे हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) ने आरोप लगाया है कि सरकार ने भगदड़ में मारे गए लोगों की वास्तविक संख्या छुपाई है। विपक्ष का कहना है कि सरकारी आंकड़े सही नहीं हैं और मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। यह मामला संसद में भी उठाया जा चुका है, जहां विपक्ष ने सरकार पर पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाया है।

आयोग की जिम्मेदारी

न्यायिक जांच आयोग को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह घटना के सभी पहलुओं की जांच करे और यह पता लगाए कि क्या प्रशासनिक लापरवाही या किसी अन्य कारण से यह घटना हुई। आयोग ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि उनके द्वारा दिए गए साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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