MP के जिला अस्पतालों में जन औषधि केंद्रों की शुरुआत: मरीजों को मिलेंगी इतनी सस्ती दवाइयां, जानें कैसे

PM Modi Birthday: MP के सभी जिला अस्पतालों में जन औषधि केंद्रों की शुरुआत, मरीजों को मिलेंगी 90% तक सस्ती दवाइयां, जानें कैसे

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PM Modi Birthday: देश के प्रधानमत्री नरेद्र मोदी के जन्मदिन पर मध्य प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में जन औषधि केंद्र की शुरूआत होने जा रही है। इन केंद्रों पर मरीजों को सस्ती दरों पर जेनेरिक दवाएं मिलेंगी।

आपको बता दें कि प्रदेश में पहले से ही शहर और गांव में 500 से ज्यादा जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। अब नए जन औषधि केंद्रों की शुरुआत के बाद मरीजों को 50% से 90% तक सस्ती करीब 2 हजार प्रकार की दवाइयां और 300 प्रकार के सर्जिकल उपकरण मिल सकेंगे।

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कब हुई थी जन औषधि केन्द्रों की शुरुआत

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों की शुरुआत 2008 में हुई थी। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के केंद्र परियोजना की शुरुआत की गई थी।

इसके बाद साल 2015 से योजना में और तेजी आई। फिलहाल योजना के अंतर्गत देश में प्रधानमंत्री (PM Modi Birthday) भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं। इन केंद्रों का संचालन भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी की मप्र राज्य शाखा करेगी।

मध्य प्रदेश में अभी इतने जन औषधि केन्द्र संचालित

मध्य प्रदेश में सभी जिलों में अभी 500 से ज्यादा जन औषधि केंद्र संचालित हैं। ये केंद्र शहर और गांव दोनों इलाकों में स्थापित किए गए हैं। इनके जरिए दिनभर हजारों लोग सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां खरीद रहे हैं। इससे उनके महीने के खर्चों में बचत हो रही है। अब सभी जिला अस्पतालों में भी प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं।

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PM जन औषधि केंद्र से ये फायदे

- प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां मिलेंगी। मरीजों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक कम दामों पर दवाइयां मिलेंगी।

- इन केंद्रों के द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेष रूप से मदद मिलेगी।

- सस्ती और सुलभ दवाओं के जरिए लोग इलाज को जारी रख सकेंगे। ऐसी गंभीर बीमारियां जैसे शुगर, ब्लड प्रेशर और हृदय रोग के प्रबंधन में ये केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

- प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। इससे  लोग ब्रांडेड दवाओं पर निर्भरता कम करेंगे और सस्ती जेनेरिक दवाओं को अपनाने की ओर बढ़ेंगे।

- इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। हर केंद्र के चालन के लिए फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी जरूरी होंगे।

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