Granny Game : ग्रैनी गेम बर्बाद कर रहा बचपन, बच्चे कर रहे ऐसा व्यवहार

आज का दौर टेक्नालॉजी का है, आज के समय में युवा पीढ़ी के लिए मोबाइल उतना जरूरी हो गया है जितना ऑक्सीजन जरूरी है। बच्चे भी भी तेजी से मोबाइल का उपयोग करना सीख चुके हैं। आजकल देखा जाता है कि छोटे-छोटे बच्चे फोन कॉल, व्हाट्सऐप, मैंसेजर आसानी से कर लेते है। लेकिन ऑनलाइन गेम्स ने बच्चों के जीवन पर काफी बुर असर डाला है। बच्चों के सिर पर मोबाइल गेम्स का भूत सवार है। इन दिनों मध्यप्रदेश में बच्चे एक नए ऑनलाइन गेम का शिकार होने लगें है। गेम का नाम है ग्रैनी गेम (Granny Game)।

ग्रैनी गैम (Granny Game) एक भूतिया गेम है। जो बच्चों काफी पॉपुलर होता जा रहा है। लेकिन बच्चों में इसके साइड इफेक्ट भी होने लगे है। एक न्यूज बेवसाइट की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 दिनों में करीब 4 बच्चों के परिजन मनोचिकित्सक के पास पहुंचे है। इस गेम (Granny Game) से यह बच्चे साइलेंट और वायलेंट हो रहे है। बच्चों के व्यवहार में बदला देखा जा रहा है। बच्चे गुमसुम रहने लगे है। वही बच्चों के परिजनों का कहना है कि बच्चो खेलने कूदने से दूरी बना रहे है।

प्रदेश के जाने माने मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी (Psychiatrist Dr. Satyakant Trivedi) के अनुसार हाल ही में एक पेरेंट्स अपने 5 साल के बच्चे को लेकर आए थे। बच्चे के दिमाग पर ग्रैनी गेम (Granny Game) का इतना ज्यादा असर हुआ, कि उसने खाना-पीना, बातचीत करना बंद कर दिया। डॉक्टर के अनुसार बच्चे ने बीते 15 दिनों से अपने पेरेंट्स से बात तक नहीं की। मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी (Psychiatrist Dr. Satyakant Trivedi) के अनुसार पिछले 20 दिनों में ऐसे चार बच्चों के पेरेंट्स आ चुके हैं। इनमें एक सागर तो तीन भोपाल के हैं। डॉ. त्रिवेदी (Psychiatrist Dr. Satyakant Trivedi)  ने बताया कि इन बच्चों में एक बात कॉमन है, सभी बच्चे एक ही गेम खेल रहे थे। जब बच्चों और पेरेंट्स की काउंसिलिंग की गई, तो पता चला कि बच्चों के दिमाग पर गेम का ही प्रभाव हो रहा है। इन बच्चों की उम्र साढ़े चार साल से 14 साल के बीच है।

Psychiatrist Dr. Satyakant Trivedi
Psychiatrist Dr. Satyakant Trivedi

बच्चों पर हो रहा ऐसा असर

दरअसल, कोरोना काल में बच्चे को मोबाइल की लत गई। जिसके चलते बच्चे फोन पर ऑनलाइन गेम खेलने लगे है। बच्चों को ऑनलाइन गेम का ऐसा असर हुआ है कि बच्चों के व्यवहार में बदलाव देखा जाने लगा है। एक पेरेट्स के अनुसार उनके बच्चे ने करीब 20 दिन से उसने बातचीत बंद कर दी। बच्चो होठों को चलाकर अपने भाव व्यक्त कर रहा था। बच्चा डरा हुआ था जिसके चलते वह परिवार से दूरी बनाने लगा था। बाद में पता चला की उनका बेटा मोबाइल पर ग्रैनी नाम का गेम (Granny Game)  खेलता है। वही दूसरे पेरेंट्स के अनुसार उनकी बच्ची को ग्रैनी गेम (Granny Game) खेलने और टीवी पर शिनचौन कार्टून देखने की लत लग गई। जिसके चलते उसके व्यवाहार में गुस्सा, चिड़चिड़ाहट बढ़ गया। वह स्कूल जाने को तैयार नहीं थी। जब डॉक्टर ने जानकारी जुटाई, तो मालूम चला कि बच्ची ऑनलाइन गेम के ग्रैनी (Granny Game) नाम के कैरेक्टर से प्रभावित है।

क्या कहते है साइकेट्रिस्ट

मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी (Psychiatrist Dr. Satyakant Trivedi) कहते है कि बच्चों के पेरेंट्स को उनके सामने खुद फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पेरेंट्स को अपने बच्चों को समय देना चाहिए। उनसे बाते करें, बच्चों के मन में क्या चल रहा है, जानने की कोशिश करें। बच्चों को घूमाने ले जाए, उनसे ड्रॉइंग, डांस जैसी एक्टिविटीज करवाएं। अगर बच्चा मोबाइल की जिद करता है तो उसे अपने सामने ही गेम खेलने को कहे। हर माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों पर नजर बनाए रखें। पेरेंट्स बच्चों से संवाद करें। ताकि बच्चों में गुस्सा, चिड़चिड़ाहट, गुमसुम जैसे लक्ष्ण न पैदा हो।

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